देहरादून। उत्तराखंड सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए विधायक निधि के तहत 375 करोड़ रुपये की राशि जारी कर दी है। प्रदेश के सभी 70 विधानसभा क्षेत्रों के विधायकों को विकास कार्यों के लिए पांच-पांच करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे। सरकार के इस निर्णय से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आधारभूत सुविधाओं से जुड़े विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami की मंजूरी और वित्त विभाग की स्वीकृति के बाद ग्राम्य विकास विभाग ने राशि जारी करने के आदेश जारी किए। अपर सचिव ग्राम्य विकास अनुराधा ने इस संबंध में आदेश जारी करते हुए सभी संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दिए हैं।
जियो टैगिंग से होगी निगरानी
सरकार ने विधायक निधि से होने वाले कार्यों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जियो टैगिंग को अनिवार्य किया है। इसके अलावा विकास कार्यों की स्वीकृति, भुगतान और खर्च से जुड़ी सभी जानकारी ऑनलाइन पोर्टल पर दर्ज की जाएगी। इससे योजनाओं की मॉनिटरिंग आसान होगी और कार्यों की प्रगति पर नजर रखी जा सकेगी।
केवल निर्माण कार्यों पर खर्च होगी निधि
सरकारी आदेश के अनुसार विधायक निधि का उपयोग केवल पूंजीगत और निर्माण कार्यों में किया जाएगा। यानी इस राशि से सड़क, भवन, सामुदायिक केंद्र, पेयजल योजनाएं और अन्य स्थायी विकास कार्य कराए जाएंगे। निधि का उपयोग किसी भी प्रकार के राजस्व व्यय में नहीं किया जा सकेगा।
विधायक अपने क्षेत्र में प्रस्तावित विकास कार्यों की सूची मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को भेजेंगे। हालांकि, स्वीकृत कार्यों के स्थान में विधायक की अनुमति के बिना बदलाव नहीं किया जा सकेगा।
दूसरे विधानसभा क्षेत्र में खर्च पर रोक
सरकार ने स्पष्ट किया है कि विधायक अपनी निधि का उपयोग दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में नहीं कर सकेंगे। हालांकि, आपदा या विशेष परिस्थितियों में निधि की 10 प्रतिशत राशि अन्य क्षेत्रों में खर्च करने की अनुमति दी जा सकती है।
सरकार का कहना है कि विधायक निधि के माध्यम से स्थानीय जरूरतों के अनुरूप विकास योजनाओं को तेजी से पूरा किया जाएगा, जिससे जनता को सीधे लाभ मिल सकेगा।