देहरादून। उत्तराखंड रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने राज्य में रियल एस्टेट कारोबार में पारदर्शिता लाने और घर खरीदारों के हितों की सुरक्षा के लिए बड़े फैसले लिए हैं। अब किसी भी आवासीय परियोजना की शुरुआत से पहले प्रमोटर्स और बिल्डरों को अपने बैंक खातों का विवरण सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। यह जानकारी समाचार पत्रों के साथ-साथ परियोजना स्थल पर लगाए जाने वाले बोर्ड, होर्डिंग और ब्रॉशर में भी प्रकाशित करनी होगी।
यह फैसला बृहस्पतिवार को रेरा की 36वीं बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता नव नियुक्त रेरा अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने की। बैठक में खरीदारों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई अन्य महत्वपूर्ण निर्णय भी लिए गए।
धोखाधड़ी के मामलों के बाद लिया गया फैसला
पिछले कुछ वर्षों में देहरादून समेत प्रदेश के कई हिस्सों में बड़े बिल्डरों द्वारा खरीदारों के साथ धोखाधड़ी के मामले सामने आए हैं। कई परियोजनाएं अधूरी छोड़ दी गईं, जबकि कुछ बिल्डर निवेशकों का पैसा लेकर फरार हो गए।
रेरा जांच में यह भी सामने आया कि कई प्रमोटर्स ने अधिकृत खातों के अलावा अन्य बैंक खातों के जरिए भी लेनदेन किया। इससे खातों को ट्रेस करने और निवेशकों का पैसा वापस दिलाने की प्रक्रिया में काफी देरी हुई। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए रेरा ने अब बैंक खातों को सार्वजनिक करने का निर्णय लिया है।
समाचार पत्रों और विज्ञापनों में देनी होगी जानकारी
रेरा अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने बताया कि परियोजना का पंजीकरण मिलने के बाद प्रमोटर को अपने अधिकृत बैंक खातों की जानकारी एक राष्ट्रीय और एक राज्य स्तरीय समाचार पत्र में प्रकाशित करनी होगी। इसके अलावा परियोजना से जुड़े सभी विज्ञापनों, ब्रॉशर, होर्डिंग और साइट बोर्ड पर भी बैंक खातों का विवरण देना अनिवार्य होगा।
उन्होंने कहा कि इससे आम लोग केवल अधिकृत खातों में ही पैसा जमा करेंगे और प्रमोटर्स द्वारा अन्य खातों में रकम लेने की संभावना खत्म हो जाएगी।
प्रमोटर्स को बनाना होगा रिजर्व फंड
बैठक में एक और अहम निर्णय लेते हुए प्रमोटर्स के लिए रिजर्व फंड बनाने को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इस फंड में आवंटियों से प्राप्त धनराशि का एक हिस्सा जमा कराया जाएगा।
रेरा के अनुसार परियोजना पूरी होने के बाद भी पांच साल तक इस फंड से पैसा नहीं निकाला जा सकेगा। इसके बाद भी राशि निकालने के लिए रेरा की अनुमति जरूरी होगी। यदि कोई बिल्डर परियोजना अधूरी छोड़ देता है या फरार हो जाता है तो इसी फंड से प्रभावित खरीदारों को राहत दी जा सकेगी।
परियोजना विस्तार की जानकारी भी होगी सार्वजनिक
रेरा ने परियोजना की समय सीमा बढ़ाने और पंजीकरण संशोधन से जुड़ी जानकारी को भी सार्वजनिक करना अनिवार्य कर दिया है। अब प्रमोटर्स को परियोजना विस्तार और संशोधन संबंधी जानकारी भी समाचार पत्रों के माध्यम से प्रकाशित करनी होगी।
इसके अलावा यदि किसी पुरानी परियोजना को निरस्त कर नया पंजीकरण लेने का आवेदन किया जाता है, तो उससे पहले आवंटियों की आपत्तियां भी सार्वजनिक की जाएंगी। आपत्तियों का समयबद्ध निस्तारण नहीं होने पर संबंधित प्रमोटर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पारदर्शी रियल एस्टेट व्यवस्था पर जोर
रेरा अध्यक्ष नरेश सी मठपाल ने कहा कि राज्य में रेरा को और अधिक मजबूत बनाया जाएगा ताकि पारदर्शी और विश्वसनीय रियल एस्टेट व्यवस्था विकसित की जा सके। उन्होंने कहा कि खरीदारों के हितों की सुरक्षा रेरा की प्राथमिकता है और नियमों का उल्लंघन करने वाले बिल्डरों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।