देहरादून। उत्तराखंड सरकार प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को मजबूत करने के लिए शराब की बोतलों पर नया सेस लगाने की तैयारी कर रही है। शहरी विकास विभाग ने प्रति शराब बोतल एक रुपये का अतिरिक्त सेस लगाने का प्रस्ताव तैयार किया है। इस राशि का उपयोग प्रदेश के सभी नगर निकायों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर बनाने में किया जाएगा।
प्रदेश में बढ़ते कचरे और उसके निस्तारण की चुनौती को देखते हुए सरकार अब स्थायी वित्तीय व्यवस्था तैयार करने में जुटी है। शहरी विकास विभाग के अनुसार, इस प्रस्ताव से मिलने वाली आय का उपयोग ठोस अपशिष्ट के संग्रहण, परिवहन और वैज्ञानिक निस्तारण पर किया जाएगा।
शहरी विकास सचिव नितेश कुमार झा ने बताया कि नगर निकायों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए लगातार धन की आवश्यकता होती है। इसी को ध्यान में रखते हुए विभाग ने यह प्रस्ताव तैयार किया है। उन्होंने कहा कि प्रस्ताव जल्द ही मुख्य सचिव के समक्ष रखा जाएगा, ताकि इसे मंजूरी मिलने के बाद लागू किया जा सके।
पहले से लग रहा तीन रुपये का सेस
प्रदेश सरकार पहले ही आबकारी नीति के तहत शराब की प्रत्येक बोतल पर तीन रुपये का उपकर वसूल रही है। इसमें एक रुपया गो सेवा, एक रुपया महिला कल्याण और एक रुपया खेल गतिविधियों के लिए निर्धारित है। अब शहरी विकास विभाग के लिए एक और रुपया जोड़ने की तैयारी की जा रही है। प्रस्ताव लागू होने के बाद शराब की प्रत्येक बोतल पर कुल चार रुपये अतिरिक्त शुल्क लिया जाएगा।
प्रदेश में रोजाना निकल रहा 2100 टन कचरा
उत्तराखंड में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन बड़ी समस्या बन चुका है। प्रदेश में प्रतिदिन 2100 टन से अधिक ठोस कचरा निकल रहा है, जिसका बड़ा हिस्सा अभी भी डंपिंग साइटों और लैंडफिल में जमा किया जा रहा है। राज्य में 60 से अधिक डंपिंग साइट मौजूद हैं, जहां करीब 23 लाख मीट्रिक टन पुराना कचरा जमा है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में वर्तमान में केवल 40 से 45 प्रतिशत ठोस अपशिष्ट का ही वैज्ञानिक तरीके से प्रबंधन हो पा रहा है। खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में कचरा एकत्र करने और उसके निस्तारण के लिए अतिरिक्त संसाधनों और बजट की जरूरत पड़ती है।
सरकार को उम्मीद है कि शराब की बोतलों पर लगाए जाने वाले नए सेस से नगर निकायों को आर्थिक सहायता मिलेगी और प्रदेश में स्वच्छता एवं कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत किया जा सकेगा।