देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे के 12 किमी अंडरपास पर सालभर का अध्ययन शुरू, 245 कैमरा ट्रैप से वन्यजीवों की निगरानी

देहरादून। देहरादून-दिल्ली एक्सप्रेसवे पर बने 12 किलोमीटर लंबे अंडरपास में वन्यजीवों की आवाजाही और उनके व्यवहार को समझने के लिए एक वर्ष का विस्तृत अध्ययन शुरू किया गया है। इस अध्ययन के तहत अब तक 245 कैमरा ट्रैप लगाए जा चुके हैं, जिनकी मदद से वन्यजीवों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है।

भारतीय वन्यजीव संस्थान की ओर से किए जा रहे इस अध्ययन का उद्देश्य यह जानना है कि अलग-अलग मौसम में वन्यजीवों की गतिविधियां कैसी रहती हैं और वे किन समयों में अंडरपास का अधिक उपयोग करते हैं। इसके साथ ही उनके मूवमेंट पैटर्न और व्यवहार संबंधी अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां भी जुटाई जाएंगी।

इससे पहले इसी अंडरपास पर 40 दिनों का एक प्रारंभिक अध्ययन किया गया था, जिसमें तेंदुआ, हाथी सहित कई अन्य वन्यजीवों की मौजूदगी दर्ज की गई थी। उस दौरान उनके मूवमेंट और समय-चक्र से जुड़ी अहम जानकारी सामने आई थी। अब उसी अध्ययन को विस्तार देते हुए पूरे एक वर्ष तक डेटा एकत्र करने का निर्णय लिया गया है।

कैमरा ट्रैप बढ़ाकर 500 से अधिक करने की योजना
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक बिलाल हबीब ने बताया कि फिलहाल 245 कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं, जिन्हें बढ़ाकर 500 से अधिक करने की योजना है। लक्ष्य है कि अंडरपास के प्रत्येक खंभे पर कैमरा ट्रैप लगाया जाए, ताकि वन्यजीवों की गतिविधियों की अधिक सटीक और व्यापक जानकारी मिल सके।

18 से अधिक प्रजातियों की हो चुकी है पहचान
अब तक के अध्ययन में करीब 18 अलग-अलग वन्यजीव प्रजातियों की पहचान की जा चुकी है। विशेषज्ञों का मानना है कि सालभर चलने वाले इस अध्ययन के दौरान और भी नई प्रजातियों की जानकारी सामने आ सकती है।

यह अध्ययन वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। साथ ही, इससे भविष्य में बनने वाले इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में पर्यावरण और विकास के बीच बेहतर संतुलन बनाने में भी मदद मिलेगी।

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