देहरादून में लंबे समय से विवादों और दहशत का पर्याय बने बिल्डर पुनीत अग्रवाल के खिलाफ जिला प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। जिला मजिस्ट्रेट सविन बंसल ने आरोपी के खिलाफ गुंडा एक्ट के तहत कार्रवाई करते हुए उसे छह माह के लिए देहरादून जनपद से जिला बदर करने के आदेश जारी किए हैं। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चाओं का माहौल बना हुआ है।
मामले की शुरुआत 25 अप्रैल 2026 को हुई, जब एटीएस कॉलोनी निवासी और डीआरडीओ की वैज्ञानिक हेम शिखा समेत अन्य लोगों ने जिला प्रशासन से शिकायत की। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 13 अप्रैल को पुनीत अग्रवाल ने डीआरडीओ में कार्यरत वरिष्ठ वैज्ञानिक के परिवार पर हमला किया था। इस दौरान मारपीट में पीड़ित का कान का पर्दा फट गया, जबकि महिलाओं और बुजुर्गों के साथ भी अभद्र व्यवहार और गाली-गलौच की गई।
शिकायत मिलने के बाद जिला मजिस्ट्रेट ने मामले का संज्ञान लेते हुए एसडीएम मसूरी से गोपनीय जांच कराई। जांच में यह बात सामने आई कि आरोपी की गतिविधियों के कारण क्षेत्र में भय और असुरक्षा का वातावरण बना हुआ था। थाना रायपुर में दर्ज एफआईआर, वायरल वीडियो क्लिप्स और स्थानीय निवासियों की शिकायतों को भी प्रशासन ने गंभीरता से लिया। डीआरडीओ के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं निदेशक मनोज कुमार ढाका ने भी आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने कोर्ट को बताया कि आरोपी की गतिविधियां जनसुरक्षा और कानून व्यवस्था के लिए खतरा बन चुकी हैं। वहीं बचाव पक्ष ने मामले को आपसी विवाद और सिविल मामला बताया, लेकिन उपलब्ध साक्ष्यों और जांच रिपोर्ट के आधार पर कोर्ट ने पुनीत अग्रवाल को अभ्यस्त आपराधिक प्रवृत्ति का व्यक्ति माना।
जिला प्रशासन के आदेश के अनुसार, पुनीत अग्रवाल अगले छह माह तक बिना अनुमति देहरादून जिले में प्रवेश नहीं कर सकेगा। आदेश का उल्लंघन करने पर उसके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही रायपुर थाना पुलिस को निर्देश दिए गए हैं कि आरोपी को 24 घंटे के भीतर जनपद की सीमा से बाहर भेजा जाए।
गौरतलब है कि इससे पहले भी दीपावली के दौरान नाबालिग बच्चों पर पिस्टल लहराने के मामले में जिला प्रशासन ने पुनीत अग्रवाल का शस्त्र लाइसेंस निलंबित किया था। आरोपी के खिलाफ मारपीट, धमकी, गाली-गलौच और उत्पीड़न समेत विभिन्न धाराओं में पांच मुकदमे पहले से दर्ज बताए जा रहे हैं।