देहरादून कैंट सीट पर भाजपा में बढ़ी हलचल, विरासत या नए चेहरे पर टिकेगी पार्टी की नजर

देहरादून की कैंट विधानसभा सीट आगामी चुनावों से पहले एक बार फिर राजनीतिक चर्चा का केंद्र बन गई है। वर्ष 1985 से भाजपा का मजबूत गढ़ रही इस सीट पर अब पार्टी के भीतर दावेदारों की सक्रियता बढ़ गई है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि भाजपा स्वर्गीय हरबंस कपूर की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएगी या किसी नए चेहरे पर भरोसा जताएगी।

देहरादून कैंट विधानसभा सीट पर भाजपा का दबदबा पिछले चार दशकों से कायम है। उत्तराखंड गठन से पहले उत्तर प्रदेश के समय वर्ष 1985 में हरबंस कपूर देहराखास सीट से पहली बार विधायक चुने गए थे। इसके बाद उन्होंने लगातार इस क्षेत्र में भाजपा को मजबूती दी और कैंट सीट को पार्टी का अभेद्य किला बना दिया।

वर्ष 2017 विधानसभा चुनाव में स्व. हरबंस कपूर ने करीब 22.89 प्रतिशत वोटों के अंतर से जीत दर्ज की थी। उनके निधन के बाद भाजपा ने 2022 के चुनाव में उनकी पत्नी सविता कपूर को प्रत्याशी बनाया। सविता कपूर ने भी पार्टी के भरोसे पर खरा उतरते हुए कांग्रेस प्रत्याशी सूर्यकांत धस्माना को बड़े अंतर से हराया। उन्होंने 27.36 प्रतिशत वोटों के अंतर से जीत दर्ज कर भाजपा का दबदबा कायम रखा।

भाजपा में कई दावेदार सक्रिय

अब सविता कपूर की बढ़ती उम्र के बीच इस सीट पर भाजपा नेताओं की सक्रियता तेज हो गई है। भाजपा प्रदेश मंत्री आदित्य चौहान लंबे समय से क्षेत्र में जनसंपर्क और संगठनात्मक गतिविधियों में जुटे हुए हैं। वहीं भाजपा नेता विनय गोयल, जोगेंद्र पुंडीर और महानगर अध्यक्ष सिद्धार्थ अग्रवाल भी चुनावी तैयारियों में सक्रिय बताए जा रहे हैं।

इसके अलावा राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि भाजपा स्व. हरबंस कपूर के पुत्र अमित कपूर को मौका देकर परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा सकती है। हालांकि संगठन में नए चेहरों को मौका देने की रणनीति पर भी मंथन चल रहा है।

जातीय और सामाजिक समीकरण अहम

देहरादून कैंट विधानसभा सीट सामाजिक और जातीय समीकरणों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां सेना के जवानों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों की बड़ी संख्या है। गढ़ी कैंट, डाकरा और आसपास के क्षेत्रों में गोरखा समुदाय का भी प्रभाव है।

इसके अलावा पर्वतीय मूल के मतदाता, खासकर ठाकुर और ब्राह्मण वर्ग, चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाते हैं। व्यापारी वर्ग, पंजाबी और वैश्य समुदाय भी यहां बड़ी संख्या में मौजूद हैं। वहीं मुस्लिम मतदाता भी करीब आठ प्रतिशत बताए जाते हैं। भाजपा पिछले कई वर्षों से इन सभी वर्गों में मजबूत पकड़ बनाए रखने में सफल रही है।

2022 चुनाव में भाजपा की बड़ी जीत

2022 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर कुल 77,113 मतदाता थे और 56.89 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था। भाजपा प्रत्याशी सविता कपूर को 45,492 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सूर्यकांत धस्माना को 24,554 मत प्राप्त हुए थे।

अब आगामी चुनावों को लेकर कैंट सीट पर राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि भाजपा अपने इस मजबूत गढ़ में राजनीतिक विरासत को प्राथमिकता देती है या संगठनात्मक समीकरणों के आधार पर किसी नए चेहरे को मैदान में उतारती है।

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