उत्तराखंड में श्रमिकों के लिए बड़ा बदलाव: एक साल में ग्रेच्युटी, पीएफ-बीमा और फ्री हेल्थ चेकअप की सुविधा

देहरादून। उत्तराखंड में श्रमिकों के हित में बड़े बदलाव की तैयारी है। राज्य सरकार द्वारा लागू की जा रही नई श्रम संहिताओं के तहत लाखों श्रमिकों को सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा से जुड़ी कई महत्वपूर्ण सुविधाएं मिलने जा रही हैं। इनमें सबसे अहम बदलाव यह है कि अब श्रमिकों को ग्रेच्युटी के लिए पांच साल तक इंतजार नहीं करना पड़ेगा, बल्कि अनुबंध पर काम करने वाले कर्मचारियों को एक साल की सेवा के बाद ही यह लाभ मिल सकेगा।

केंद्र सरकार की चार प्रमुख श्रम संहिताएं—मजदूरी संहिता, सामाजिक सुरक्षा संहिता, औद्योगिक संबंध संहिता और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्यस्थल परिस्थितियां संहिता—को उत्तराखंड सरकार पहले ही अपना चुकी है। अब श्रम विभाग इन संहिताओं को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए नियमावली तैयार कर रहा है।

नियमावली तैयार करने की प्रक्रिया तेज
श्रम विभाग ने “उत्तराखंड मजदूरी संहिता नियमावली 2026” का प्रारूप 18 मार्च 2026 को जारी किया था, जिस पर 17 अप्रैल तक सुझाव और आपत्तियां आमंत्रित की गई थीं। अब प्राप्त सुझावों के आधार पर इसे अंतिम रूप दिया जा रहा है और जल्द ही इसे राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

इसके अलावा, “उत्तराखंड औद्योगिक संबंध संहिता नियमावली 2026” का ड्राफ्ट भी जारी कर दिया गया है। इस पर 30 मई तक आम जनता, संगठनों और संबंधित पक्षों से सुझाव मांगे गए हैं। सुझाव सचिव, श्रम विभाग, उत्तराखंड सचिवालय देहरादून या निर्धारित ई-मेल आईडी पर भेजे जा सकते हैं। शेष दो संहिताओं—सामाजिक सुरक्षा और व्यावसायिक सुरक्षा—की नियमावली भी शीघ्र जारी होने की संभावना है।

श्रमायुक्त पीसी दुम्का के अनुसार, राज्य में चारों श्रम संहिताओं को अपनाया जा चुका है और अब उनकी नियमावली लागू करने की दिशा में तेजी से काम किया जा रहा है, ताकि श्रमिकों को इनका सीधा लाभ मिल सके।

श्रमिकों को मिलेंगे ये प्रमुख लाभ
नई श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद राज्य में सभी श्रमिकों के लिए एक समान न्यूनतम मजदूरी सुनिश्चित की जाएगी। वेतन का भुगतान समयबद्ध और डिजिटल माध्यम से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी।

अनुबंध पर कार्यरत श्रमिकों को एक वर्ष की सेवा पूरी करने पर ही ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा। इसके साथ ही, ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों और गिग वर्कर्स—जैसे डिलीवरी और राइडिंग पार्टनर—को पहली बार भविष्य निधि (पीएफ) और बीमा योजनाओं से जोड़ा जाएगा।

महिला श्रमिकों को भी राहत दी गई है। वे अपनी सहमति से रात की शिफ्ट में काम कर सकेंगी, बशर्ते नियोक्ता उनकी सुरक्षा और घर तक सुरक्षित पहुंच सुनिश्चित करे।

नई व्यवस्था के तहत किसी भी कर्मचारी का मूल वेतन कुल वेतन का कम से कम 50 प्रतिशत निर्धारित किया जाएगा, जिससे पीएफ और ग्रेच्युटी की राशि में वृद्धि होगी।

इसके अलावा, 40 वर्ष से अधिक आयु के श्रमिकों के लिए साल में एक बार मुफ्त स्वास्थ्य जांच की सुविधा भी प्रदान की जाएगी।

इन सुधारों से राज्य के श्रमिकों को बेहतर सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक मजबूती और सुरक्षित कार्य वातावरण मिलने की उम्मीद है।

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