श्रीनगर गढ़वाल: Hemvati Nandan Bahuguna Garhwal University का 12वां दीक्षांत समारोह मंगलवार को गरिमामय वातावरण में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति डॉ. योगेंद्र नारायण ने की, जबकि उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर शिक्षा सत्र 2022-24 और 2023-25 के कुल 6806 विद्यार्थियों को विभिन्न डिग्रियां प्रदान की गईं, जबकि समारोह में भाग लेने के लिए 649 छात्रों ने पंजीकरण कराया।
पंजीकरण कराने वाले छात्रों में 472 स्नातकोत्तर (पीजी) और 177 पीएचडी शोधार्थी शामिल रहे। समारोह के दौरान 79 मेधावी विद्यार्थियों को मंच पर गोल्ड मेडल देकर सम्मानित किया गया। स्वर्ण पदक के लिए कुल 105 छात्र-छात्राओं ने पंजीकरण कराया था, जिनमें 50 विद्यार्थी सत्र 2022-24 और 55 विद्यार्थी सत्र 2023-25 के थे। दोनों सत्रों में मिलाकर 319 शोधार्थियों को पीएचडी की उपाधि प्रदान की गई।
विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय पहचान दिलाने का लक्ष्य
समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में पहुंचे उच्च शिक्षा मंत्री डॉ. धन सिंह रावत ने कहा कि विश्वविद्यालय वर्तमान कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह के नेतृत्व में बेहतर कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय की नैक ग्रेडिंग इसकी गुणवत्ता का प्रमाण है। मंत्री ने कहा कि संस्थान को और अधिक ऊर्जा और प्रतिबद्धता के साथ कार्य करना होगा ताकि इसे राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिल सके।
उन्होंने यह भी आश्वासन दिया कि उत्तराखंड सरकार विश्वविद्यालय के विकास के लिए हर संभव सहायता प्रदान करेगी। साथ ही बताया कि अप्रैल माह में देश के उच्च शिक्षा मंत्री के साथ एनआईटी और गढ़वाल विश्वविद्यालय में कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है।
विद्यार्थियों को नवाचार और विकास के लिए प्रेरित किया
समारोह की अध्यक्षता करते हुए कुलाधिपति डॉ. योगेंद्र नारायण ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि युवाओं को अतीत के ज्ञान से प्रेरणा लेते हुए आधुनिक और पारंपरिक ज्ञान के आधार पर नवाचार तथा विकास के लिए निरंतर प्रयास करना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए खुद को तैयार रखने का आह्वान किया।
डिग्री केवल कागज नहीं, विद्यार्थियों की ताकत: कुलपति
इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीप्रकाश सिंह ने अतिथियों का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और भविष्य की योजनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह शिक्षा का अंत नहीं बल्कि जीवन की नई शुरुआत है।
उन्होंने कहा कि डिग्री केवल कागज का टुकड़ा नहीं होती, बल्कि यह विद्यार्थियों की ताकत और उनके ज्ञान का प्रतीक होती है, जो उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री का संदेश पढ़ा गया
कार्यक्रम का संचालन कर रहे डॉ. विश्वेश वाग्मी ने समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का संदेश पढ़कर सुनाया। अपने संदेश में उन्होंने दीक्षार्थियों से देश की विकास यात्रा में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया और कहा कि वे अपने ज्ञान व कौशल का उपयोग समाज और राष्ट्र के हित में भी करें।
शोध पत्रिका ‘माउंटेन रिसर्च’ का विमोचन
दीक्षांत समारोह के दौरान विश्वविद्यालय के ग्रामीण एवं अभियंत्रिकी विभाग की शोध पत्रिका ‘माउंटेन रिसर्च’ के विशेषांक का विमोचन भी किया गया। कुलाधिपति, कुलपति और विशिष्ट अतिथियों ने पत्रिका के प्रकाशन पर विभाग को बधाई दी और इसे पर्वतीय क्षेत्रों के शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण बताया।
दीक्षांत समारोह में दिखी पहाड़ी संस्कृति
इस बार दीक्षांत समारोह में पहली बार पारंपरिक पहाड़ी संस्कृति की झलक देखने को मिली। विश्वविद्यालय ने वर्षों से चली आ रही गाउन पहनने की परंपरा को समाप्त करते हुए विद्यार्थियों को पारंपरिक वेशभूषा में डिग्री प्रदान की।
समारोह में उपाधि लेने पहुंचे छात्र-छात्राएं पहाड़ी टोपी, रंग-बिरंगे पटके और पारंपरिक परिधानों में नजर आए, जिसने कार्यक्रम को सांस्कृतिक रूप से और अधिक आकर्षक बना दिया।
संस्कृत के दो विद्यार्थियों ने जीते पांच-पांच गोल्ड मेडल
दीक्षांत समारोह में शैक्षणिक सत्र 2022-24 की संस्कृत विषय की छात्रा ज्योति और 2023-25 के संस्कृत विषय के छात्र मनीष शिवांशु ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए पांच-पांच गोल्ड मेडल हासिल किए। दोनों विद्यार्थियों को संस्कृत विषय में टॉप करने के साथ ही दानदाताओं की ओर से दिए जाने वाले विशेष स्वर्ण पदक भी प्रदान किए गए।
इस प्रकार गढ़वाल विश्वविद्यालय का 12वां दीक्षांत समारोह शिक्षा, उपलब्धियों और सांस्कृतिक परंपराओं का अनूठा संगम बनकर संपन्न हुआ।