उत्तरकाशी: भागीरथी नदी को पुराने मार्ग की ओर मोड़ा गया
उत्तरकाशी जिले में बहने वाली भागीरथी नदी के प्रवाह को उसके पुराने मार्ग की ओर डायवर्ट कर दिया गया है। यह कार्य बंद पड़ी लोहारीनागपाला जल विद्युत परियोजना के तहत बनाए गए इनटेक पोल को मलबे से भरकर बंद किए जाने के बाद किया गया।
उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड (यूजेवीएनएल) की ओर से बाल कंडार मंदिर के समीप परियोजना निर्माण के दौरान बने इनटेक पोल को पूरी तरह मलबे से भर दिया गया है। इसके साथ ही निर्माण के समय बनी झील को भी धीरे-धीरे मलबे से भरकर समाप्त किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि इस कार्य से क्षेत्र में कटाव की समस्या कम होगी और यातायात भी सुरक्षित हो सकेगा।
गंगोत्री हाईवे और बाल कंडार मंदिर पर मंडरा रहा था खतरा
परियोजना के निर्माण के बाद से इनटेक पोल के बीच से बह रही भागीरथी नदी लगातार गंगोत्री हाईवे के किनारों पर कटाव कर रही थी। इससे सड़क के साथ ही बाल कंडार मंदिर के अस्तित्व पर भी खतरा उत्पन्न हो गया था।
कटाव और दूसरी ओर निर्माण के दौरान बनी झील के कारण सड़क का दायरा कई जगहों पर केवल चार से पांच मीटर ही रह गया था, जिससे वाहनों की आवाजाही में हमेशा जोखिम बना रहता था। अब इनटेक पोल और झील दोनों को बंद किए जाने के बाद बाल कंडार क्षेत्र में आवाजाही पहले की तुलना में अधिक सुरक्षित हो गई है। इससे चारधाम यात्रा के दौरान भी यात्रियों को राहत मिलने की उम्मीद है।
बंद परियोजना की सुरंगों को भी किया जाएगा स्थायी रूप से सील
यूजेवीएनएल द्वारा वर्ष 2010 में बंद की गई लोहारीनागपाला जल विद्युत परियोजना की छह सुरंगों को भी स्थायी रूप से बंद करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इस योजना के तहत सोनगाड़ क्षेत्र में बाल कंडार मंदिर के पास स्थित इनटेक पोल को बंद किया गया और नदी का प्रवाह पुराने रास्ते की ओर मोड़ा गया।
यूजेवीएनएल मनेरी के अधिशासी अभियंता महावीर सिंह नाथ ने बताया कि सुरंगों में जमा पानी को चरणबद्ध तरीके से बाहर निकाला जा रहा है। डि-वॉटरिंग के बाद सभी सुरंगों का विस्तृत निरीक्षण किया जाएगा। जहां भी संरचना कमजोर या ढीली मिलेगी, वहां आवश्यक उपचार किया जाएगा। इसके बाद सुरंगों के दोनों सिरों पर लगभग पांच-पांच मीटर तक प्लगिंग कर उन्हें स्थायी रूप से बंद कर दिया जाएगा।