उत्तराखंड में बढ़ा बिजली संकट: मांग 4.5 करोड़ यूनिट पहुंची, कई जिलों में शुरू हुई कटौती

बढ़ती गर्मी के साथ बिजली की मांग में उछाल, आपूर्ति कम पड़ने से संकट

उत्तराखंड में बिजली की मांग में अचानक आई तेज बढ़ोतरी के चलते प्रदेश में बिजली संकट के हालात बनने लगे हैं। बाजार में बिजली की भारी किल्लत के कारण कई जिलों में कटौती शुरू कर दी गई है। पिछले दो दिनों से ग्रामीण क्षेत्रों, छोटे कस्बों और औद्योगिक इकाइयों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हो रही है।

ऊर्जा विभाग के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में 12 दिनों के भीतर बिजली की मांग 3.8 करोड़ यूनिट से बढ़कर 4.5 करोड़ यूनिट तक पहुंच गई है। वहीं उपलब्ध बिजली मात्र करीब 2.3 करोड़ यूनिट ही है, जिससे मांग और आपूर्ति के बीच बड़ा अंतर पैदा हो गया है।

उत्पादन और केंद्रीय पूल से सीमित बिजली

राज्य की जलविद्युत परियोजनाओं से करीब 90 लाख यूनिट बिजली मिल रही है, जबकि केंद्रीय पूल से लगभग 1.3 करोड़ यूनिट बिजली की आपूर्ति हो रही है। इस प्रकार कुल उपलब्ध बिजली करीब 2.3 करोड़ यूनिट ही रह गई है।

बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को बाजार से करीब 70 लाख यूनिट बिजली खरीदनी पड़ रही है। हालांकि बाजार में भी बिजली की भारी कमी है और इंडियन एनर्जी एक्सचेंज में 10 रुपये प्रति यूनिट की कीमत पर भी बिजली आसानी से उपलब्ध नहीं हो पा रही है।

ग्रामीण क्षेत्रों और उद्योगों में कटौती

बिजली की कमी के चलते हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर के ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिदिन करीब दो से ढाई घंटे बिजली कटौती की जा रही है। वहीं छोटे कस्बों में लगभग एक से डेढ़ घंटे तक बिजली बंद रखी जा रही है।

इसके अलावा स्टील फर्नेस उद्योगों में भी करीब दो घंटे की बिजली कटौती की जा रही है, जिससे औद्योगिक उत्पादन पर असर पड़ रहा है।

गैस की कमी से बंद पड़े गैस आधारित पावर प्लांट

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी इस्राइल-ईरान युद्ध के कारण गैस की आपूर्ति प्रभावित हुई है, जिसका असर बिजली उत्पादन पर भी पड़ा है। गैस की कमी के चलते काशीपुर स्थित 214 मेगावाट क्षमता का श्रावंती और गामा कंपनी का गैस आधारित बिजली संयंत्र फिलहाल बंद पड़ा है।

इन संयंत्रों को उत्पादन के लिए बाजार से गैस खरीदनी होगी, लेकिन वर्तमान में गैस या तो उपलब्ध नहीं है या फिर बहुत महंगे दामों में मिल रही है। यदि महंगी गैस से बिजली उत्पादन किया गया तो यूपीसीएल को यह बिजली 10 रुपये प्रति यूनिट से भी अधिक कीमत पर खरीदनी पड़ सकती है।

150 मेगावाट बिजली खरीद पर नियामक आयोग की रोक

यूपीसीएल ने 500 मेगावाट बिजली खरीद के लिए पावर परचेज एग्रीमेंट (पीपीए) किया था। लेकिन इसमें से 350 मेगावाट बिजली तकनीकी कारणों के चलते उपलब्ध नहीं हो सकी। वहीं शेष 150 मेगावाट बिजली खरीद पर भी नियामक आयोग ने फिलहाल रोक लगा दी है।

सूत्रों के मुताबिक इस बिजली की खरीद के लिए यूपीसीएल को दोबारा नियामक आयोग से अनुमति लेनी होगी। ऐसे में बढ़ती मांग के बीच बिजली आपूर्ति संतुलित करना ऊर्जा विभाग के लिए चुनौती बनता जा रहा है।

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