विश्व किडनी दिवस: किडनी प्रत्यारोपण से मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद, एम्स में 22 सफल ट्रांसप्लांट

विश्व किडनी दिवस: किडनी प्रत्यारोपण से मरीजों को नई जिंदगी की उम्मीद, एम्स में 22 सफल ट्रांसप्लांट

देहरादून। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गुर्दा रोग से जूझ रहे मरीजों के लिए किडनी प्रत्यारोपण को सबसे प्रभावी उपचार बताया है। उनका कहना है कि समय पर इलाज और अंगदान के प्रति जागरूकता बढ़ने से हजारों मरीजों को नई जिंदगी मिल सकती है। आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में किडनी प्रत्यारोपण गंभीर गुर्दा रोगियों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है।

एम्स के गुर्दा रोग विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. शेरोन कंडारी के अनुसार मानव शरीर में गुर्दे बेहद महत्वपूर्ण अंग होते हैं। ये रक्त को साफ करने, शरीर से अतिरिक्त पानी और विषैले पदार्थों को बाहर निकालने, रक्तचाप को नियंत्रित रखने तथा शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने का कार्य करते हैं।

उन्होंने बताया कि जब किसी कारण से गुर्दों की कार्यक्षमता 10 से 15 प्रतिशत से भी कम रह जाती है, तब मरीज को डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण की आवश्यकता पड़ती है। डायलिसिस को अस्थायी उपचार माना जाता है, जबकि किडनी प्रत्यारोपण गुर्दा विफलता का सबसे प्रभावी और स्थायी इलाज है। सफल प्रत्यारोपण के बाद मरीज सामान्य जीवन के काफी करीब जीवन जी सकता है और उसकी जीवन गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होता है।

तीन से चार घंटे तक चलती है सर्जरी

किडनी प्रत्यारोपण से पहले मरीज और दाता दोनों की विस्तृत चिकित्सकीय जांच की जाती है। सर्जरी के दौरान दाता की किडनी निकालकर मरीज के शरीर के निचले पेट के हिस्से में प्रत्यारोपित की जाती है। सामान्यतः मरीज के पुराने गुर्दों को नहीं निकाला जाता। पूरी प्रक्रिया लगभग तीन से चार घंटे तक चलती है। ऑपरेशन के लगभग एक सप्ताह बाद मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाती है।

हर कार्यदिवस पर पंजीकरण की सुविधा

डॉ. शेरोन कंडारी ने बताया कि किडनी प्रत्यारोपण के लिए एम्स के गुर्दारोग विभाग में पंजीकरण की सुविधा शनिवार को छोड़कर हर कार्यदिवस पर उपलब्ध है। यहां ट्रांसप्लांट से संबंधित ओपीडी सप्ताह में तीन दिन—सोमवार, मंगलवार और बृहस्पतिवार को आयोजित की जाती है।

पंजीकरण के लिए मरीज को पहचान प्रमाण, निवास प्रमाण, मेडिकल रिकॉर्ड और डोनर से जुड़ी जानकारी अस्पताल में जमा करनी होती है। यदि मरीज के पास जीवित दाता उपलब्ध नहीं है तो वह मृत दाता (कैडेवर) के लिए प्रतीक्षा सूची में शामिल होने के लिए सरकारी पोर्टल या अस्पताल के माध्यम से पंजीकरण कर सकता है।

एम्स में अब तक 22 मरीजों का सफल प्रत्यारोपण

एम्स को रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन से आठ जनवरी 2021 को किडनी ट्रांसप्लांट की अनुमति मिली थी। इसके बाद अप्रैल 2023 में यहां पहला सफल किडनी प्रत्यारोपण किया गया।

डॉ. कंडारी के अनुसार अब तक एम्स में 22 मरीजों में सफल किडनी प्रत्यारोपण किया जा चुका है। वहीं 111 मरीजों की किडनी ट्रांसप्लांट प्रक्रिया जारी है और इनके पास अंगदाता उपलब्ध हैं। इसके अलावा करीब 50 मरीज ऐसे हैं जो मृत दाता से किडनी मिलने की प्रतीक्षा सूची में शामिल हैं।

अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी बड़ी चुनौती

विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में अंगदान के प्रति जागरूकता की कमी के कारण बड़ी संख्या में जरूरतमंद मरीजों को अंगदाता नहीं मिल पाते हैं। वर्तमान में केवल लगभग 10 प्रतिशत मरीजों को ही किडनी उपलब्ध हो पाती है, जबकि लगभग 90 प्रतिशत मरीज प्रत्यारोपण से वंचित रह जाते हैं।

सामाजिक कार्यकर्ताओं और चिकित्सकों का मानना है कि अंगदान के महत्व को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि बचपन से ही बच्चों में इसके प्रति जागरूकता विकसित हो सके।

आंकड़ों के अनुसार स्पेन में मस्तिष्क मृत मरीजों से अंगदान की दर विश्व में सबसे अधिक है, जहां प्रति दस लाख आबादी पर 33 लोग अंगदान करते हैं। इसके मुकाबले भारत में यह दर बेहद कम है और प्रति दस लाख आबादी पर लगभग 0.05 ही है, यानी सालाना करीब 50 मृत शरीर दाता ही उपलब्ध हो पाते हैं।

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