हरिद्वार। भारतीय राजनीति के चाणक्य कहे जाने वाले केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने धर्मनगरी हरिद्वार से उत्तराखंड विधानसभा चुनाव का बिगुल फूंक दिया है। गंगा के तट से शाह ने न केवल विपक्षी हमलों की धार कुंद की, बल्कि अपनी ही पार्टी के भीतर पनप रही गुटबाजी को भी कड़ा संदेश दिया। इस रैली का सबसे मुख्य आकर्षण शाह का युवाओं के साथ सीधा और भावनात्मक जुड़ाव रहा।
युवाओं से भावनात्मक जुड़ाव: ‘जिगर के टुकड़े’ मंत्र से भरा जोश
अमित शाह जानते हैं कि उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य में पलायन और रोजगार सबसे संवेदनशील मुद्दे हैं। इन्हीं मुद्दों पर विपक्ष को घेरने का मौका न देते हुए, शाह ने युवाओं के मन की धड़कन को पढ़ने की कोशिश की।
- संबोधन: शाह ने मंच से कई बार युवाओं को ‘जिगर के टुकड़े’ कहकर संबोधित किया।
- रणनीति: इस भावनात्मक कार्ड के जरिए उन्होंने यह संदेश देने का प्रयास किया कि केंद्र और राज्य की ‘डबल इंजन’ सरकार युवाओं के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर है।
- असर: युवाओं ने इस संबोधन को उत्साह के साथ आत्मसात किया, जिससे बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष की घेराबंदी कमजोर होती दिखी।
भीतरघात और गुटबाजी पर ‘सर्जिकल स्ट्राइक’
शाह ने हरिद्वार की रैली से राज्य के बड़े नेताओं को कई खुले और कुछ ‘बंद’ संदेश दिए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि अब नेताओं को आपसी बयानबाजी छोड़कर चुनावी मोड में आना होगा।
- एकजुटता का फ्रेम: शाह ने अपने भाषण की शुरुआत में पूर्व मुख्यमंत्रियों—त्रिवेंद्र सिंह रावत, निशंक, बहुगुणा और तीरथ सिंह रावत का नाम एक साथ लिया। इसके जरिए संदेश दिया गया कि पार्टी के भीतर कोई गुटबाजी नहीं है।
- धामी सरकार की सराहना: सीएम पुष्कर सिंह धामी की खुले मन से तारीफ कर शाह ने उन नेताओं को खामोश कर दिया जो सरकार के कामकाज पर सवाल उठाते रहे हैं।
- संगठन को निर्देश: शाह का ‘बंद संदेश’ साफ था—गुटबाजी पर विराम लगाएं और गंगा किनारे से मिली ‘जीत के बीज मंत्र’ पर काम शुरू करें।
विकास और हिंदुत्व का ‘विजय संकल्प’
धर्मनगरी से शाह ने केवल भविष्य के वादे नहीं किए, बल्कि पिछले 9 वर्षों की उपलब्धियों का लेखा-जोखा भी रखा।
- प्रमुख प्रोजेक्ट्स: ऑल वेदर रोड, ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल लाइन और केदारनाथ पुनर्निर्माण को सरकार की मुख्य ढाल बनाया।
- वोट बैंक की एकजुटता: हरिद्वार की पावन भूमि से विकास और संस्कृति के मेल का उल्लेख कर उन्होंने ‘हिंदू वोट बैंक’ को एकजुट रखने का बड़ा प्रयास किया।
“भाजपा का शीर्ष नेतृत्व जानता है कि अगले चुनाव में युवा मतदाता निर्णायक होंगे। शाह के ‘जिगर के टुकड़ों’ की धड़कन अब सरकार और संगठन को और गहराई से सुननी होगी।”
निष्कर्ष: तीसरी जीत का मार्ग प्रशस्त
अमित शाह की इस मौजूदगी ने कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार किया है। सरकार और संगठन को एक मंच पर लाकर उन्होंने यह साफ कर दिया है कि भाजपा आगामी चुनाव में पूरी ताकत और एकजुटता के साथ उतरने वाली है।