उत्तराखंड में विधानसभा चुनावों की तैयारियों के बीच कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर चल रही अटकलों पर कांग्रेस चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष एवं पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत ने सख्त रुख अपनाया है। कार्यकर्ताओं के एक कार्यक्रम में दिए गए उनके बयान ने साफ कर दिया है कि पार्टी में टिकट किसी की सिफारिश या नजदीकी के आधार पर नहीं, बल्कि चुनाव जीतने की क्षमता के आधार पर तय होगा।
हरक सिंह रावत ने कहा कि पार्टी के भीतर कुछ लोग अभी से राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे का नाम लेकर यह दावा कर रहे हैं कि उनका टिकट पक्का है। इस पर तंज कसते हुए उन्होंने कहा, “टिकट तो राहुल गांधी का भी फाइनल नहीं है। फिर किसी और का कैसे तय हो सकता है?”
उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रदेश चुनाव प्रबंधन समिति अध्यक्ष होने के नाते उनके पास टिकट के लिए कई सिफारिशें आ रही हैं, लेकिन पार्टी हित सर्वोपरि है। जो नेता अपनी सीट पर जीत सुनिश्चित कर सकता है, टिकट उसी को मिलेगा—चाहे वह किसी का करीबी हो या न हो। किसी भी स्तर पर दबाव या पक्षपात को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अपने राजनीतिक रुख को स्पष्ट करते हुए हरक सिंह रावत ने कहा, “मैं पार्टी का सिपाही हूं। जिस सीट से कोई चुनाव नहीं लड़ेगा, वहां से मैं खुद चुनाव लड़ूंगा। और यदि जरूरत पड़ी तो पार्टी के लिए दरी बिछाने और नारे लगाने से भी पीछे नहीं हटूंगा।”
नारों को लेकर उठे सवालों पर उन्होंने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष के समर्थन में नारे लगाना पार्टी के समर्थन के समान है। वहीं, ज्योति रौतेला के पक्ष में नारे लगाने को उन्होंने महिलाओं के समर्थन से जोड़ते हुए बताया।
कुल मिलाकर, हरक सिंह रावत का यह बयान कांग्रेस में टिकट वितरण को लेकर पारदर्शी और प्रदर्शन-आधारित नीति का संकेत देता है, जिसने राज्य की राजनीति में नई चर्चा को जन्म दिया है।