कैडर आवंटन नीति में बदलाव: IAS, IPS और भारतीय वन सेवा अधिकारियों की तैनाती को लेकर नई व्यवस्था लागू

कैडर आवंटन नीति में केंद्र सरकार का बड़ा फैसला

केंद्र सरकार ने अखिल भारतीय सेवाओं से जुड़े अधिकारियों के लिए कैडर आवंटन नीति में अहम संशोधन किया है। इस फैसले का सीधा प्रभाव Indian Administrative Service (आईएएस), Indian Police Service (आईपीएस) और Indian Forest Service (भारतीय वन सेवा/आईएफओएस) के अधिकारियों की नियुक्ति और तैनाती प्रक्रिया पर पड़ेगा। सरकार का कहना है कि नई नीति से कैडर आवंटन प्रणाली अधिक पारदर्शी और प्रभावी होगी।

हर साल 1 जनवरी तक तय होंगी रिक्तियां

संशोधित नीति के तहत संबंधित मंत्रालय प्रत्येक वर्ष 1 जनवरी तक कैडर अंतर (कैडर गैप) के आधार पर रिक्त पदों का निर्धारण करेंगे। इससे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अधिकारियों की वास्तविक आवश्यकता के अनुसार समय पर नियुक्तियां सुनिश्चित की जा सकेंगी।

पांच-क्षेत्र प्रणाली समाप्त, चार नए समूह लागू

नई नीति के तहत कैडर आवंटन के लिए पहले से चली आ रही पांच-क्षेत्र प्रणाली को समाप्त कर दिया गया है। इसके स्थान पर सभी राज्य कैडरों और संयुक्त कैडरों को अंग्रेजी वर्णमाला के क्रम में रखते हुए चार समूहों में बांटा गया है। सरकार के अनुसार, यह बदलाव कैडर आवंटन प्रक्रिया को सरल बनाने और सभी क्षेत्रों में प्रशासनिक संतुलन बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया है।

कैडर और संयुक्त कैडर का अर्थ

कैडर या संयुक्त कैडर से आशय उन राज्यों, राज्यों के समूहों या केंद्र शासित प्रदेशों से है, जहां अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों की तैनाती की जाती है। नई व्यवस्था के तहत इन्हीं कैडरों को चार समूहों में विभाजित किया गया है।


चार समूहों में शामिल राज्य

समूह-1

अरुणाचल प्रदेश–गोवा–मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश (AGMUT), आंध्र प्रदेश, असम–मेघालय, बिहार और छत्तीसगढ़।

समूह-2

गुजरात, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, कर्नाटक, केरल और मध्य प्रदेश।

समूह-3

महाराष्ट्र, मणिपुर, नागालैंड, ओडिशा, पंजाब, राजस्थान, सिक्किम और तमिलनाडु।

समूह-4

तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल।


अधिकारियों की तैनाती पर क्या होगा असर?

नई कैडर आवंटन नीति लागू होने के बाद भविष्य में चयनित अधिकारियों की तैनाती प्रक्रिया में बदलाव देखने को मिलेगा। केंद्र सरकार का दावा है कि इससे राज्यों में अधिकारियों का संतुलित वितरण, प्रशासनिक दक्षता और कार्य प्रणाली में सुधार होगा।

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