देहरादून। उत्तराखंड सरकार के आगामी बजट को लेकर महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास मंत्री रेखा आर्या ने बड़ा सुझाव दिया है। उन्होंने मुख्य सचिव आनंद वर्धन को पत्र लिखकर राज्य के कुल बजट का कम से कम 30 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाओं के लिए आरक्षित करने की मांग की है।
मंत्री रेखा आर्या ने पत्र में कहा है कि प्रदेश में करीब दो दशकों से जेंडर बजटिंग की व्यवस्था लागू है, लेकिन शुरुआती दौर में महिला केंद्रित योजनाओं के लिए सीमित बजट ही आवंटित किया जाता था। उन्होंने बताया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में पिछले पांच वर्षों के दौरान जेंडर बजट में लगातार वृद्धि हुई है, जिससे महिलाओं के उत्थान से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिली है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2021-22 में उत्तराखंड का जेंडर बजट लगभग 12 प्रतिशत था। इसे 2022-23 में बढ़ाकर 13.77 प्रतिशत किया गया। इसके बाद 2023-24 में यह करीब 14 प्रतिशत रहा, जबकि 2024-25 में महिलाओं के लिए 16 प्रतिशत बजट निर्धारित किया गया। वहीं 2025-26 में कुल 1,01,175 करोड़ रुपये के बजट में जेंडर बजट का हिस्सा लगभग 17 प्रतिशत तक पहुंच गया।
मंत्री ने कहा कि प्रदेश की महिलाओं को सही मायनों में सशक्त बनाने और उन्हें आर्थिक व सामाजिक रूप से मजबूत करने के लिए अधिक धनराशि की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से उन्होंने आगामी बजट में महिला केंद्रित योजनाओं के लिए 30 प्रतिशत बजट का प्रावधान करने का सुझाव दिया है, ताकि महिलाओं के लिए चलाई जा रही योजनाओं का दायरा और प्रभाव दोनों बढ़ाया जा सके।
जेंडर बजट क्या है
जेंडर बजट राज्य सरकार के आम बजट का वह हिस्सा होता है, जिसे विशेष रूप से महिलाओं के कल्याण, उत्थान और सशक्तीकरण से जुड़ी योजनाओं पर खर्च किया जाता है। यह राशि विभिन्न विभागों के माध्यम से संचालित महिला केंद्रित कार्यक्रमों पर खर्च की जाती है और इसे किसी अन्य मद में उपयोग करने का प्रावधान नहीं होता।