भारतीय नौसेना की मारक क्षमता और समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करने वाला एक बड़ा कदम बुधवार को पूरा हुआ। मझगांव डॉक शिपबिल्डिंग लिमिटेड (एमडीएल) ने प्रोजेक्ट-17A के अंतर्गत निर्मित उन्नत स्टेल्थ फ्रिगेट ‘तारागिरि’ को मुंबई में औपचारिक रूप से नौसेना को सौंप दिया।
रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह उपलब्धि आत्मनिर्भर भारत मिशन के रक्षा क्षेत्र में उल्लेखनीय सफलता का प्रमाण है।
पुराने युद्धपोत का आधुनिक और अपग्रेडेड रूप
‘तारागिरि’ उसी नाम के उस पुराने युद्धपोत का नया और आधुनिक संस्करण है, जिसने 1980 से 2013 तक भारतीय नौसेना में 33 वर्षों तक सेवाएं दीं।
नई ‘तारागिरि’ को उन्नत स्टेल्थ डिजाइन, बेहतर सुरक्षा, आधुनिक सेंसर और अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से लैस किया गया है।
प्रोजेक्ट-17A: उन्नत तकनीक वाला बहु-क्षमतावान युद्धपोत
प्रोजेक्ट-17A के तहत बनाए जा रहे युद्धपोत, P-17 (शिवालिक क्लास) की तुलना में काफी उन्नत हैं।
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, ये युद्धपोत आधुनिक समुद्री चुनौतियों का सामना करने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं और इनमें उच्च स्तरीय ऑटोमेशन और सर्वाइवेबिलिटी फीचर्स शामिल हैं।
‘तारागिरि’ में शामिल घातक हथियार और उन्नत सिस्टम
इस युद्धपोत में कई अत्याधुनिक हथियार और संवेदनशील तकनीकें लगाई गई हैं, जिनमें शामिल हैं—
- ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल
- MF-STAR मल्टीफंक्शनल रडार
- MRSAM एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम
- 76 मिमी सुपर रैपिड गन
- 30 मिमी और 12.7 मिमी क्लोज-इन वेपन सिस्टम
- पनडुब्बी रोधी टॉरपीडो और रॉकेट लॉन्चर सिस्टम
इन सभी प्रणालियों से ‘तारागिरि’ सतह, हवा और समुद्र के भीतर—तीनों स्तरों पर दुश्मन को जवाब देने में सक्षम है।
निर्माण में तेजी, समय से पहले पूरा काम
पिछले 11 महीनों में नौसेना को प्रोजेक्ट-17A के चार युद्धपोत मिल चुके हैं।
पहले दो जहाजों से मिले अनुभव के आधार पर ‘तारागिरि’ का निर्माण समय कम होकर 93 महीनों से घटकर 81 महीने रह गया।
परियोजना के बाकी तीन जहाज अगस्त 2026 तक नौसेना को सौंप दिए जाएंगे।
उच्च स्वदेशीकरण: रोजगार और उद्योग को मिला बढ़ावा
प्रोजेक्ट-17A में 75% स्वदेशी हिस्सेदारी है, जो रक्षा उपकरणों के स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देती है।
इस परियोजना से—
- 200 से ज्यादा MSMEs जुड़े
- 4,000 लोगों को सीधा रोजगार,
- और 10,000 से अधिक लोगों को परोक्ष रोजगार मिला है।
युद्धपोत ‘तारागिरि’ की प्रमुख खूबियां
- कुल वजन: 3510 टन
- डिस्प्लेसमेंट: 6670 टन
- लंबाई: 149 मीटर
- चौड़ाई: 17.8 मीटर
- अधिकतम गति: 28 नॉट (लगभग 52–59 किमी/घंटा)
- इंजन: दो गैस टर्बाइन और दो डीजल इंजन
- तैनाती क्षमता: 35 अधिकारी + 150 नौसैनिक
यह स्टेल्थ फ्रिगेट समुद्र में लंबी दूरी के मिशन, युद्धक अभियान, निगरानी और पनडुब्बी रोधी ऑपरेशनों के लिए अत्यंत सक्षम है।