देहरादून। उत्तराखंड में चल रही जनगणना के पहले चरण में परिवार की गणना को लेकर नई व्यवस्था लागू कर दी गई है। अब किसी भी मकान में परिवारों की संख्या का निर्धारण “रसोई” के आधार पर किया जाएगा। यानी, एक ही घर में यदि अलग-अलग रसोई हैं, तो उन्हें अलग-अलग परिवार माना जाएगा।
प्रदेशभर में जनगणना निदेशालय की ओर से मकान सूचीकरण और मकान गणना का कार्य जारी है, जो 24 मई तक चलेगा। इस दौरान आम लोगों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा था कि एक घर में रहने वाले कितने लोगों को एक परिवार माना जाएगा। इस पर जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने स्थिति स्पष्ट की है।
उन्होंने बताया कि यदि किसी घर में रहने वाले लोग एक ही रसोई से भोजन करते हैं, तो उन्हें एक ही परिवार के रूप में गिना जाएगा। उदाहरण के तौर पर, पति-पत्नी, साथ रहने वाले मित्र या कोई घरेलू सहायिका यदि एक ही रसोई का उपयोग करते हैं, तो वे सभी एक परिवार माने जाएंगे।
इसके विपरीत, जिन घरों में एक से अधिक रसोई हैं, वहां प्रत्येक रसोई को एक अलग परिवार का संकेत माना जाएगा। जैसे किसी घर में माता-पिता और उनके बेटों के परिवार अलग-अलग रसोई चलाते हैं, तो हर रसोई के आधार पर अलग-अलग परिवारों की गिनती होगी।
वहीं, यदि दादा-दादी, माता-पिता और अन्य सदस्य एक ही रसोई से भोजन करते हैं, तो उन्हें संयुक्त परिवार के रूप में एक ही परिवार माना जाएगा।
जनगणना निदेशालय ने इस संबंध में प्रदेशभर के अधिकारियों को स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, ताकि गणना के दौरान किसी प्रकार की भ्रम की स्थिति न बने। इस नई व्यवस्था से जनगणना के आंकड़ों को अधिक सटीक बनाने में मदद मिलेगी।