डॉल्फिन सहित जलीय जीवों के संरक्षण और रेस्क्यू कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए अब अत्याधुनिक डॉल्फिन एंबुलेंस को सेवा में उतारा गया है। यह विशेष एंबुलेंस एक्सरे, ईसीजी, ब्लड एनालिसिस जैसी आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से लैस है, जिससे रेस्क्यू किए गए डॉल्फिन के स्वास्थ्य की तुरंत जांच और आवश्यकता पड़ने पर प्राथमिक इलाज संभव हो सकेगा।
मंगलवार को भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) से केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल ने डॉल्फिन एंबुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस पहल को टीएस फाउंडेशन इंडिया संस्था ने साकार किया है, जो लंबे समय से डॉल्फिन, घड़ियाल और अन्य जलीय जीवों के संरक्षण एवं अध्ययन के क्षेत्र में कार्य कर रही है।
टीएस फाउंडेशन इंडिया की बायोलॉजिस्ट सुप्रिया दत्ता ने बताया कि उनकी संस्था वर्ष 2013 से अब तक उत्तर प्रदेश में 41 डॉल्फिन का सफल रेस्क्यू कर चुकी है। अब तक यह कार्य सामान्य ट्रकों के माध्यम से किया जाता था, लेकिन नई डॉल्फिन एंबुलेंस के आने से रेस्क्यू प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और वैज्ञानिक हो जाएगी।
उन्होंने बताया कि एंबुलेंस को जलीय जीवों की जरूरतों को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया है। इसमें डॉल्फिन को सुरक्षित रखने के लिए स्ट्रेचर, शरीर को नम बनाए रखने के लिए 500 लीटर क्षमता का पानी टैंक और शॉवर सिस्टम की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही एंबुलेंस में ईसीजी, एक्सरे और ब्लड जांच की सुविधा उपलब्ध है। जरूरत पड़ने पर मौके पर ही इलाज के लिए पशु चिकित्सक भी मौजूद रहेंगे।
भारतीय वन्यजीव संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. विपल मौर्य ने बताया कि कई बार डॉल्फिन नदियों से भटककर नहरों में पहुंच जाती हैं। पानी का स्तर कम होने पर वे वहां फंस जाती हैं और उन्हें तत्काल रेस्क्यू की आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में यह विशेष एंबुलेंस डॉल्फिन के जीवन को बचाने में अहम भूमिका निभाएगी।
बताया गया कि यह डॉल्फिन के लिए अपने प्रकार की पहली विशेष एंबुलेंस है, जो जलीय जीव संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। इससे न सिर्फ रेस्क्यू कार्यों में तेजी आएगी, बल्कि डॉल्फिन संरक्षण को भी नई मजबूती मिलेगी।