उत्तराखंड में नई आवास नीति की तैयारी तेज, शहरों और तीर्थधामों की धारण क्षमता का होगा निर्धारण

उत्तराखंड: प्रदेश में जल्द लागू होगी नई आवास नीति, कैरिंग कैपेसिटी स्टडी को मिलेगी प्राथमिकता

उत्तराखंड में बदलती शहरी परिस्थितियों और बढ़ती आबादी को देखते हुए राज्य सरकार नई आवास नीति बनाने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके साथ ही प्रदेश के प्रमुख शहरों और धार्मिक तीर्थस्थलों, खासकर चारधाम क्षेत्रों की धारण क्षमता (कैरिंग कैपेसिटी) तय करने के लिए भी जल्द प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

आवास विभाग की समीक्षा बैठक में सचिव आवास डॉ. आर. राजेश कुमार ने यह जानकारी देते हुए अधिकारियों को कई अहम निर्देश दिए। बैठक में उत्तराखंड आवास एवं नगर विकास प्राधिकरण और जिलास्तरीय विकास प्राधिकरणों के कार्यों की विस्तृत समीक्षा की गई।

प्रधानमंत्री आवास योजना पर फोकस

बैठक में प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 और 2.0 के अंतर्गत चल रहे निर्माण कार्यों, स्वीकृत परियोजनाओं और आवंटन की स्थिति पर चर्चा हुई। सचिव आवास ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर पूरे किए जाएं, ताकि शहरी क्षेत्रों में जरूरतमंद और पात्र लोगों को समय पर आवास उपलब्ध कराया जा सके।

उन्होंने कहा कि निर्माण गुणवत्ता के साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही या देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।

2017 की नीति की अवधि समाप्त, नई नीति जरूरी

सचिव आवास ने बताया कि वर्ष 2017 में लागू की गई आवास नीति की वैधता अवधि समाप्त हो चुकी है। ऐसे में वर्तमान जरूरतों और भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए एक नई और व्यावहारिक आवास नीति तैयार करना आवश्यक है।
उन्होंने निर्देश दिए कि नई नीति में—

  • तेजी से बढ़ते शहरीकरण की चुनौतियां
  • किफायती और समावेशी आवास
  • पर्वतीय क्षेत्रों की भौगोलिक व पर्यावरणीय स्थितियां
  • सतत और संतुलित विकास

जैसे बिंदुओं को विशेष रूप से शामिल किया जाए।

विकास प्राधिकरणों के लंबित कार्यों पर सख्ती

बैठक में एमडीडीए और एचआरडीए की विभिन्न परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। सचिव आवास ने एचआरडीए को लंबित विकास कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा करने के निर्देश दिए, ताकि शहरी विकास योजनाओं का लाभ आम जनता तक समय पर पहुंच सके।

कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी पर मंथन

बैठक में कैरिंग कैपेसिटी असेसमेंट स्टडी के लिए तैयार ड्राफ्ट पर भी चर्चा की गई। सचिव आवास ने कहा कि यह अध्ययन राज्य के प्रमुख नगरों, तीर्थस्थलों और संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने निर्देश दिए कि पर्वतीय इलाकों में इस अध्ययन को प्राथमिकता दी जाए, जिससे विकास कार्य पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखते हुए किए जा सकें।

इसके अलावा, एनपीएमसी के तहत प्रधानमंत्री आवास योजना (शहरी) 1.0 से जुड़े सभी कार्यों को सितंबर 2026 तक पूरा करने और 15 दिनों के भीतर आवंटन सहित सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए।

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