नमामि गंगे योजना की ऑडिट रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: करोड़ों से बने 21 एसटीपी घरों से नहीं जुड़े, गंगा सफाई पर उठे सवाल

गंगा सफाई की योजनाओं पर ऑडिट रिपोर्ट ने उठाए सवाल

उत्तराखंड में गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए चलाई जा रही नमामि गंगे योजना के क्रियान्वयन में गंभीर खामियां सामने आई हैं। हाल ही में आई ऑडिट रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि करोड़ों रुपये खर्च कर बनाए गए कई सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) आज तक घरों के सीवर नेटवर्क से नहीं जोड़े गए हैं।

रिपोर्ट के अनुसार राज्य के गंगा तटवर्ती शहरों में 21 एसटीपी का निर्माण किया गया, लेकिन सीवर लाइनें न बिछने और घरेलू कनेक्शन न होने के कारण इनका पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में इन संयंत्रों में केवल नालों से आने वाले धूसर पानी का ही शोधन किया जा रहा है।


ज्योतिर्मठ में करोड़ों खर्च के बाद भी अधूरी व्यवस्था

ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार भू-धंसाव से प्रभावित ज्योतिर्मठ में 3.78 एमएलडी क्षमता के दो एसटीपी बनाए गए हैं। इन परियोजनाओं पर सरकार अब तक करीब 42 करोड़ 78 लाख रुपये खर्च कर चुकी है।

हालांकि, यहां आज तक किसी भी घर को इन एसटीपी से नहीं जोड़ा गया है। फिलहाल केवल पांच नालों से आने वाले धूसर पानी का ही शोधन हो रहा है। रिपोर्ट में यह भी संकेत दिया गया कि जमीन के अंदर पानी का रिसाव भी भू-धंसाव की एक संभावित वजह हो सकता है।


नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग और रुद्रप्रयाग में भी यही स्थिति

ऑडिट में अन्य शहरों की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई।

  • नंदप्रयाग में 6.51 करोड़ रुपये की लागत से दो एसटीपी बनाए गए, लेकिन केवल तीन नालों को ही उनसे जोड़ा गया है।
  • कर्णप्रयाग में लगभग 12 करोड़ रुपये खर्च कर पांच एसटीपी बनाए गए। यहां सात नालों को जोड़ा गया, लेकिन घरों को सीवर कनेक्शन नहीं दिए गए।
  • रुद्रप्रयाग में करीब 13 करोड़ रुपये की लागत से छह एसटीपी बने, जिनमें केवल आठ नालों का पानी जा रहा है।

इन शहरों में भी किसी भी घर का सीवर कनेक्शन एसटीपी से नहीं जुड़ा पाया गया।


कीर्तिनगर, चमोली और श्रीनगर में भी सीमित उपयोग

रिपोर्ट के अनुसार कीर्तिनगर में चार करोड़ रुपये की लागत से दो एसटीपी बनाए गए, लेकिन इन्हें भी घरेलू सीवर लाइन से नहीं जोड़ा गया।

चमोली में पुराने सस्पेंशन ब्रिज के पास करीब 64 करोड़ रुपये की लागत से एसटीपी बनाया गया, लेकिन इसे केवल एक नाले से जोड़ा गया है।

इसके अलावा श्रीनगर और श्रीकोट में बनाए गए तीन एसटीपी भी घरों के सीवर नेटवर्क से नहीं जुड़े पाए गए।


बिना मांग के बना दिए 11 श्मशान घाट

ऑडिट रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि नमामि गंगे योजना के तहत जनता की मांग के बिना ही 11 श्मशान घाटों का निर्माण कर दिया गया।

इनमें चमोली, नंदप्रयाग, कर्णप्रयाग, पोखरी पुल कर्णप्रयाग, घोलतीर रुद्रप्रयाग, कोटेश्वर टिहरी, गौचर, केदार उत्तरकाशी, हीना उत्तरकाशी, डुंडा उत्तरकाशी और उमरकोट कर्णप्रयाग शामिल हैं।

इसके बावजूद अधिकांश स्थानों पर लोग आज भी नदी के तल में ही अंतिम संस्कार कर रहे हैं। ऑडिट में पाया गया कि केवल केदार श्मशान घाट में ही कुछ चिताएं जलाई गईं।


ठोस अपशिष्ट प्रबंधन में भी अनियमितताएं

रिपोर्ट में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर भी बड़ी लापरवाही सामने आई है। प्रदेश के 44 नगर निकाय ऐसे पाए गए, जो प्रतिदिन पांच टन से अधिक ठोस कचरा एकत्र करते हैं।

इसके बावजूद इनमें से किसी भी निकाय ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) से आवश्यक प्रमाणपत्र प्राप्त नहीं किया है। कुछ निकायों ने आवेदन जरूर किया, लेकिन वे पीसीबी के मानकों के अनुरूप नहीं पाए गए।


गंगा स्वच्छता मिशन के क्रियान्वयन पर उठे सवाल

ऑडिट रिपोर्ट से स्पष्ट है कि गंगा को स्वच्छ बनाने के लिए चलाई जा रही कई परियोजनाओं का सही तरीके से क्रियान्वयन नहीं हो पाया है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद एसटीपी का पूरा उपयोग नहीं हो रहा और कई योजनाएं अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रही हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जल्द ही सीवर नेटवर्क को एसटीपी से जोड़ा नहीं गया और अपशिष्ट प्रबंधन व्यवस्था को सुदृढ़ नहीं किया गया, तो गंगा सफाई का लक्ष्य हासिल करना कठिन हो सकता है।

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