उत्तराखंड: मदरसा बोर्ड खत्म होने के डर से खाली हुई कक्षाएं; 30 मदरसों में हाईस्कूल-इंटर का एक भी छात्र नहीं

देहरादून: उत्तराखंड में मदरसा शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने की सरकारी कवायद के बीच एक चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा 1 जुलाई 2026 से मदरसा बोर्ड को समाप्त कर ‘उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण’ के गठन के निर्णय का सीधा असर छात्र संख्या पर पड़ा है। प्रदेश के 54 मान्यता प्राप्त उच्चतर मदरसों में से 30 मदरसे ऐसे हैं, जहाँ मुंशी (हाईस्कूल) और आलिम (इंटर) स्तर पर एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया है।

बोर्ड के विलय की अनिश्चितता से डरे छात्र

मदरसा बोर्ड के भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण अभिभावकों और छात्रों में डर का माहौल है। मदरसा आईशा सिद्दीका (लंढौरा) के प्रबंधक अब्दुस्लाम के अनुसार, “चूंकि 1 जुलाई से मदरसा बोर्ड अस्तित्व में नहीं रहेगा, इसी डर से छात्रों ने मुंशी और आलिम स्तर पर प्रवेश नहीं लिया।”

वर्तमान में स्थिति यह है कि:

  • कुल मान्यता प्राप्त उच्चतर मदरसे: 54
  • छात्र विहीन मदरसे: 30
  • आलिम स्तर पर कुल छात्र: पूरे प्रदेश में मात्र 83 नियमित छात्र।
  • निजी परीक्षार्थी: केवल 16 छात्रों ने व्यक्तिगत श्रेणी में परीक्षा दी है।

मान्यता पर मंडराया संकट

उत्तराखंड अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी ने बताया कि मदरसों की मान्यता के लिए कड़े मानक तय हैं। नियमों के मुताबिक, मुंशी और मौलवी स्तर पर कम से कम 30 छात्र होने अनिवार्य हैं। साथ ही, उच्चतर कक्षाओं की मान्यता बनाए रखने के लिए न्यूनतम 10 परीक्षार्थियों का परीक्षा में शामिल होना जरूरी है। वर्तमान स्थिति यह है कि 54 में से मात्र 9 मदरसे ही इन मानकों पर खरे उतर रहे हैं, जिससे शेष मदरसों की मान्यता रद्द होने का खतरा पैदा हो गया है।

नया सत्र शुरू, पर संबद्धता (Affiliation) का पता नहीं

प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में 1 अप्रैल 2026 से नया शैक्षणिक सत्र (2026-27) शुरू होने जा रहा है, लेकिन अब तक एक भी मदरसे को उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद (UBSE) से संबद्धता नहीं मिली है।

“हम पहले चरण में बैठकों के जरिए मदरसों की समस्याओं को समझ रहे हैं। इसके बाद उन्हें सरकारी विद्यालयी शिक्षा से संबद्ध करने का प्रयास किया जाएगा। बोर्ड से जुड़ने के बाद छात्रों की संख्या बढ़ेगी। धार्मिक शिक्षा के लिए एक विशेष कमेटी बनाई गई है जो तय करेगी कि पाठ्यक्रम में क्या और कितना पढ़ाया जाएगा।” — डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, अध्यक्ष, अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण


मुख्य बिंदु (Quick Highlights):

  • 1 जुलाई 2026: मदरसा बोर्ड के आधिकारिक समापन की तिथि।
  • 452 मदरसे: राज्य में कुल संचालित मदरसों की संख्या।
  • शून्य पंजीकरण: 30 मदरसों में हाईस्कूल और इंटर स्तर पर कोई छात्र नहीं।
  • भविष्य की योजना: मदरसों को अब ‘उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा परिषद’ से जोड़ने की तैयारी।

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