देहरादून। उत्तराखंड में श्रमिकों के काम के घंटे और न्यूनतम मजदूरी तय करने की व्यवस्था में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है। श्रम विभाग ने मजदूरी संहिता नियमावली-2026 का मसौदा जारी करते हुए सुझाव मांगे हैं। प्रस्तावित नियमों के अनुसार अब किसी भी श्रमिक से एक दिन में अधिकतम 10 घंटे ही काम कराया जा सकेगा। इससे अधिक समय तक काम कराने पर नियोक्ता को ओवरटाइम का अलग से भुगतान करना होगा।
सरकार ने पहली बार न्यूनतम मजदूरी तय करने के लिए वैज्ञानिक फार्मूला अपनाने का प्रस्ताव रखा है। इसमें श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन पर होने वाले खर्च को भी शामिल किया गया है। श्रम विभाग ने इस मसौदे पर आम जनता, संगठनों और विशेषज्ञों से एक माह के भीतर सुझाव मांगे हैं।
कार्य घंटे और विश्राम के नए नियम
मसौदे में श्रमिकों के कार्य समय को लेकर स्पष्ट प्रावधान किए गए हैं।
- किसी भी श्रमिक से एक दिन में 10 घंटे से अधिक काम नहीं लिया जा सकेगा।
- सप्ताह में कुल कार्य अवधि 48 घंटे से अधिक नहीं होगी।
- लगातार छह घंटे काम करने के बाद कम से कम आधे घंटे का विश्राम देना अनिवार्य होगा।
यदि कोई श्रमिक निर्धारित समय से अधिक काम करता है तो उसे सामान्य मजदूरी से दोगुनी दर पर ओवरटाइम भुगतान दिया जाएगा।
वैज्ञानिक आधार पर तय होगी न्यूनतम मजदूरी
नई नियमावली में न्यूनतम मजदूरी निर्धारण के लिए कुछ मानक तय किए गए हैं, जिनमें श्रमिक परिवार की बुनियादी जरूरतों को शामिल किया गया है।
इन मानकों के अनुसार:
- प्रति व्यक्ति प्रतिदिन 2700 कैलोरी भोजन की आवश्यकता को आधार माना जाएगा।
- एक परिवार के लिए सालाना 66 मीटर कपड़े का प्रावधान होगा।
- भोजन और कपड़े पर होने वाले कुल खर्च का 10 प्रतिशत आवास किराया माना जाएगा।
- बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा और मनोरंजन के लिए कुल मजदूरी का 25 प्रतिशत अतिरिक्त जोड़ा जाएगा।
परिवार की परिभाषा का दायरा बढ़ाया
नई नियमावली में श्रमिक परिवार की परिभाषा को भी स्पष्ट किया गया है। इसमें पति-पत्नी, 21 वर्ष तक के आश्रित पुत्र, अविवाहित पुत्रियां, शारीरिक या मानसिक रूप से अक्षम संतान और आश्रित माता-पिता को शामिल किया गया है।
महिला श्रमिकों के मामले में सास-ससुर को भी परिवार का हिस्सा माना जाएगा, जिससे श्रमिक कल्याण योजनाओं का लाभ व्यापक स्तर पर परिवारों तक पहुंच सकेगा।
‘अत्यधिक कुशल’ श्रमिकों की नई श्रेणी
कौशल के आधार पर अभी तक श्रमिकों को अकुशल, अर्द्धकुशल और कुशल तीन श्रेणियों में रखा जाता था। नई नियमावली में ‘अत्यधिक कुशल’ नाम से चौथी श्रेणी भी जोड़ी गई है।
इस श्रेणी में वे श्रमिक शामिल होंगे जिनके पास विशेष तकनीकी दक्षता, उत्कृष्ट कार्य क्षमता और निर्णय लेने की क्षमता होगी। ऐसे श्रमिकों को उनकी योग्यता के अनुसार बेहतर मजदूरी और अन्य लाभ मिल सकेंगे।
सुझाव भेजने के लिए एक माह का समय
श्रम विभाग ने इस मसौदे पर आम लोगों से सुझाव आमंत्रित किए हैं। इच्छुक व्यक्ति अधिसूचना जारी होने के 30 दिनों के भीतर सचिव, श्रम विभाग या श्रम आयुक्त को ई-मेल के माध्यम से अपनी राय भेज सकते हैं।
ई-मेल:
सरकार का कहना है कि प्राप्त सुझावों के आधार पर नियमावली में संशोधन कर अंतिम रूप दिया जाएगा, जिससे राज्य के श्रमिकों के हितों की बेहतर सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।