जम्मू-कश्मीर के किश्तवाड़ जिले में आतंकियों के खिलाफ चलाए गए संयुक्त सर्च ऑपरेशन के दौरान उत्तराखंड के कपकोट क्षेत्र के बीथी गांव निवासी सेना के जवान हवलदार गजेंद्र सिंह गढ़िया वीरगति को प्राप्त हो गए। वह भारतीय सेना की 2-पैरा कमांडो यूनिट में तैनात थे और आतंकवादियों की तलाश में चल रहे ऑपरेशन त्राशी का हिस्सा थे। उनके बलिदान की खबर से पूरे क्षेत्र में शोक की लहर है।
जानकारी के अनुसार, रविवार को किश्तवाड़ के छात्रू क्षेत्र के सिंहपोरा इलाके में सुरक्षा बलों द्वारा सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा था। इसी दौरान आतंकियों ने अचानक ग्रेनेड से हमला कर दिया। इस हमले में हवलदार गजेंद्र सिंह गंभीर रूप से घायल हो गए और देश की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।
आज पहुंचेगा पार्थिव शरीर
शहीद जवान का पार्थिव शरीर मंगलवार को हेलीकॉप्टर के माध्यम से केदारेश्वर मैदान लाया जाएगा। इसके बाद सरयू और खीरगंगा नदी के संगम पर पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। अंतिम विदाई में बड़ी संख्या में स्थानीय लोग, प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल होंगे।
परिवार में शोक का माहौल
43 वर्षीय शहीद गजेंद्र सिंह अपने पीछे पिता धन सिंह गढ़िया, माता चंद्रा देवी, पत्नी लीला गढ़िया और दो पुत्र राहुल व धीरज को छोड़ गए हैं। उनका छोटा भाई किशोर गढ़िया है। दोनों बच्चे देहरादून में पढ़ाई कर रहे हैं।
खबर मिलते ही गांव पहुंचीं पत्नी
बलिदान की सूचना मिलने के बाद पत्नी लीला गढ़िया की तबीयत बिगड़ गई थी। परिचितों की सहायता से उन्हें गरुड़ के मेलाडुंगरी हेलीपैड लाया गया, जहां से वह हेलीकॉप्टर द्वारा गांव पहुंचीं। शहीद के आवास पर सांत्वना देने वालों का तांता लगा हुआ है।
2004 में हुए थे सेना में भर्ती
गजेंद्र सिंह गढ़िया ने प्रारंभिक शिक्षा गांव से प्राप्त की थी। कक्षा छह से इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई उन्होंने राजकीय इंटर कॉलेज, कपकोट से की। स्नातक प्रथम वर्ष के दौरान वर्ष 2004 में वह भारतीय सेना में भर्ती हुए थे और तब से निरंतर देश सेवा में लगे रहे।
शहीद गजेंद्र सिंह गढ़िया का बलिदान पूरे उत्तराखंड और देश के लिए गर्व का विषय है। उनकी वीरता और समर्पण को हमेशा याद रखा जाएगा।