उत्तराखंड: फाल्गुन पूर्णिमा पर साल का पहला चंद्रग्रहण 3 मार्च को, सूतक काल के कारण बंद रहेंगे मंदिर
उत्तराखंड समेत देशभर में 3 मार्च को वर्ष 2026 का पहला चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। फाल्गुन माह की पूर्णिमा तिथि पर पड़ने वाला यह चंद्रग्रहण धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ग्रहण को लेकर मंदिर प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच तैयारियां शुरू हो गई हैं तथा कई मंदिरों में सूचना जारी कर दी गई है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार चंद्रग्रहण की शुरुआत दोपहर 3:20 बजे से होगी, जबकि इसका समापन शाम 6:47 बजे पर होगा। इस तरह ग्रहण की कुल अवधि लगभग 3 घंटे 27 मिनट रहेगी। यह चंद्रग्रहण सिंह राशि और मघा नक्षत्र में लगने जा रहा है, जिसका विशेष प्रभाव धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माना जाता है।
नौ घंटे पहले शुरू होगा सूतक काल
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने बताया कि चंद्रग्रहण भारत में दिखाई देगा, इसलिए इसका सूतक काल पूर्ण रूप से मान्य रहेगा। परंपराओं के अनुसार ग्रहण से नौ घंटे पूर्व सूतक काल शुरू हो जाता है। इसी के चलते 3 मार्च को सुबह 6:20 बजे से सूतक काल आरंभ हो जाएगा और ग्रहण समाप्त होने तक प्रभावी रहेगा।
मंदिरों के कपाट रहेंगे बंद
सूतक काल लगने के साथ ही मंदिरों में पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठान बंद कर दिए जाएंगे। प्रदेश के कई प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं को जानकारी देने के लिए नोटिस और पोस्टर लगाए गए हैं। सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद रहेंगे और नियमित दर्शन व्यवस्था भी प्रभावित रहेगी।
मांगलिक कार्यों पर रहेगी रोक
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण और सूतक काल के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नामकरण और अन्य मांगलिक कार्य नहीं किए जाते। ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक यह पूर्ण चंद्रग्रहण होगा, जिसके दौरान चंद्रमा लाल रंग का दिखाई दे सकता है।
धर्माचार्यों ने लोगों को ग्रहण काल में भगवान का स्मरण, मंत्र जाप और ध्यान करने की सलाह दी है। वहीं ग्रहण समाप्ति के बाद स्नान और दान-पुण्य करना शुभ माना गया है।