अपर यमुना वन प्रभाग में पहली बार नजर आया सिरकीर मालकोह पक्षी, वन विभाग ने बताया पर्यावरण के लिए शुभ संकेत

उत्तरकाशी।
उत्तरकाशी जनपद के अपर यमुना वन प्रभाग क्षेत्र में जैव विविधता को लेकर एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। यहां नगर क्षेत्र के आसपास पहली बार सिरकीर मालकोह पक्षी दिखाई दिया है। वन विभाग की टीम ने इस दुर्लभ पक्षी की तस्वीरें कैमरे में कैद कर इसकी पुष्टि की है।

वन अधिकारियों का कहना है कि इस प्रजाति का इस क्षेत्र में दिखना स्थानीय पारिस्थितिक तंत्र के लिए सकारात्मक संकेत है। आमतौर पर यह पक्षी मैदानी और शुष्क झाड़ीदार वनों में पाया जाता है, ऐसे में पर्वतीय क्षेत्र के पास इसका दिखाई देना पर्यावरणीय बदलाव और जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग ने इसके संरक्षण और निगरानी के लिए आवश्यक कदम उठाने की बात कही है।

वन क्षेत्राधिकारी रवांई शेखर सिंह राणा ने बताया कि सिरकीर मालकोह एक लंबी पूंछ वाली, जैतून-भूरे रंग की चिड़िया है, जिसकी पहचान इसकी अनोखी घुमावदार लाल चोंच से होती है। यह पक्षी सामान्यतः लगभग 3280 फीट से कम ऊंचाई वाले खुले और झाड़ीदार वन क्षेत्रों में पाया जाता है, लेकिन बड़कोट और आसपास के इलाके में इसका दिखना दुर्लभ है और शोध का विषय भी माना जा रहा है।

उन्होंने बताया कि मौजूदा समय में पक्षी अन्य जीवों की तुलना में जलवायु परिवर्तन के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। ऐसे में किसी नई प्रजाति का दिखना यह दर्शाता है कि क्षेत्र का पर्यावरण अभी संतुलित स्थिति में है।

वन विभाग के अनुसार, जैव विविधता के मामले में उत्तरकाशी जिला पहले से ही समृद्ध है। पक्षी विशेषज्ञों द्वारा यहां अब तक लगभग 370 प्रजातियों का रिकॉर्ड दर्ज किया जा चुका है। सिरकीर मालकोह के दिखाई देने से इस सूची में एक और प्रजाति जुड़ गई है, जो जिले की प्राकृतिक संपदा को और मजबूत बनाती है।

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