सेतु आयोग: इसी माह तैयार होगी उत्तराखंड की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति, ग्रामीण विकास पर तेज़ होंगे प्रयास

उत्तराखंड को विकसित और आत्मनिर्भर राज्य बनाने की दिशा में उत्तराखंड सेतु आयोग लगातार ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रहा है। राज्य में नीति निर्माण से आगे बढ़ते हुए जमीनी स्तर पर प्रभावी बदलाव लाने के उद्देश्य से आयोग विभिन्न क्षेत्रों में समन्वित प्रयास कर रहा है। इसी क्रम में प्रदेश की ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नीति को इसी महीने अंतिम रूप दिए जाने की तैयारी है।

सेतु आयोग प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं, वन आधारित अर्थव्यवस्था और ठोस कूड़ा प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में नई नीतियों और गहन अध्ययन पर काम कर रहा है। इसके साथ ही पशुपालन और डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए एक समग्र रणनीति तैयार की जा रही है, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

सेतु आयोग के उपाध्यक्ष राजशेखर जोशी ने बताया कि उत्तराखंड की भौगोलिक, सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए ऐसे विकास मॉडल तैयार किए जा रहे हैं, जो टिकाऊ और समावेशी हों। उन्होंने कहा कि विकास केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित नहीं हो सकता, बल्कि सामाजिक सुधार, संस्थागत सशक्तिकरण और पर्यावरणीय संतुलन को साथ लेकर चलना आवश्यक है।

ग्रामीण क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए सेतु आयोग कृषि, डेयरी, पशुपालन और कौशल विकास को विकास की आधारशिला मान रहा है। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के सहयोग से पशुपालन एवं डेयरी विभाग के लिए एक व्यापक रणनीति तैयार की जा रही है, जिसके तहत डेयरी सेक्टर के साथ-साथ आंचल ब्रांड को भी नई गति दी जाएगी। यह रणनीति इसी माह के अंत तक तैयार होने की संभावना है।

जोशी ने कहा कि ग्लेशियरों का पीछे हटना, ग्लेशियल झीलों में वृद्धि, खेती की जमीन का खाली होना और भूकंपीय जोखिम जैसी चुनौतियों को अवसर के रूप में देखने की जरूरत है। सही नीति, प्रभावी क्रियान्वयन और मजबूत साझेदारी से इन चुनौतियों को विकास के नए मॉडल में बदला जा सकता है।

किसानों के लिए नई पहल

सेतु आयोग और कृषि विभाग की संयुक्त पहल से चकराता और जौनपुर ब्लॉक में महिंद्रा ग्रुप के सहयोग से आधुनिक सिंचाई आधारित पायलट प्रोजेक्ट शुरू किया गया है। इसके साथ ही प्रदेश के चार स्थानों पर किसानों के लिए कलेक्शन सेंटर खोले जाएंगे, जिससे उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा। वहीं, तीन स्थानों पर आधुनिक ग्रामीण केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे, जिनका संचालन स्वयं सहायता समूहों या किसान उत्पादक संगठनों द्वारा किया जाएगा।

पंचायती राज व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सेतु आयोग, पंचायती राज विभाग और क्वालिटी काउंसिल ऑफ इंडिया के सहयोग से ग्राम प्रधानों के प्रशिक्षण की योजना बनाई जा रही है। इससे पंचायतों को सुदृढ़ करने और ग्राम स्तर पर सुशासन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कौशल विकास में दिखने लगे परिणाम

कौशल विकास के क्षेत्र में सेतु आयोग की पहल के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल में टाटा समूह द्वारा संचालित होटल उद्योग से जुड़े प्रशिक्षण केंद्र से प्रशिक्षित युवाओं को अब टाटा सहित अन्य प्रतिष्ठित कंपनियों में रोजगार मिल रहा है। इससे स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हो रहे हैं। आयोग आने वाले समय में सरकारी विभागों के सहयोग से ऐसे और प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना पर काम कर रहा है।

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