राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से करने पर भड़के संजय निरुपम, कांग्रेस के आचरण को बताया ‘रावण जैसा’

नई दिल्ली। कांग्रेस नेता नाना पटोले द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान श्रीराम से किए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में विवाद तेज हो गया है। शिवसेना नेता संजय निरुपम ने इस बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए इसे पूरी तरह हास्यास्पद बताया और कहा कि कांग्रेस के आचरण को देखते हुए उसकी तुलना भगवान राम से नहीं, बल्कि रावण से की जानी चाहिए। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने भी इस टिप्पणी को हिंदू भावनाओं का अपमान करार दिया है।

संजय निरुपम ने गुरुवार को बयान जारी कर कहा कि कांग्रेस का इतिहास भगवान राम और राम मंदिर के विरोध से जुड़ा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के प्रस्ताव के दौरान कांग्रेस ने बार-बार बाधाएं उत्पन्न कीं और एक समय भगवान राम के अस्तित्व पर भी सवाल उठाए गए थे। ऐसे में अब कांग्रेस नेताओं द्वारा राम के आदर्शों की दुहाई देना राजनीतिक पाखंड है।

संजय निरुपम ने क्या कहा?

शिवसेना नेता ने कहा, “यह अत्यंत हास्यास्पद है कि जो पार्टी हमेशा राम विरोधी रही, वह आज अपने नेता की तुलना भगवान राम से कर रही है। राम के नाम को कलंकित न करें। कांग्रेस के नेताओं के आचरण और उनकी राजनीति को देखते हुए मेरी राय में उनकी तुलना राम से नहीं, बल्कि रावण से होनी चाहिए।”

क्या था नाना पटोले का बयान?

दरअसल, बुधवार को राहुल गांधी के अयोध्या राम मंदिर न जाने को लेकर पूछे गए सवाल पर कांग्रेस नेता नाना पटोले ने कहा था कि कांग्रेस भगवान राम का ही कार्य कर रही है। उन्होंने कहा, “जैसे भगवान राम ने शोषितों, पीड़ितों और वंचितों के लिए काम किया, वैसे ही राहुल गांधी पूरे देश में न्याय की लड़ाई लड़ रहे हैं।”
पटोले ने यह भी याद दिलाया था कि जब रामलला मंदिर में ताला लगा था, तब तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने ही मंदिर के द्वार खुलवाने का आदेश दिया था।

भाजपा ने बताया हिंदू भावनाओं का अपमान

भाजपा नेता सी.आर. केशवन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बयान हिंदू भावनाओं का घोर अपमान है और इसे किसी भी सूरत में माफ नहीं किया जा सकता। उन्होंने सवाल उठाया कि नाना पटोले राहुल गांधी से यह पूछने का साहस क्यों नहीं करते कि उन्होंने प्राण प्रतिष्ठा समारोह का उपहास क्यों उड़ाया और वे अब तक अयोध्या राम मंदिर क्यों नहीं गए।

भाजपा नेताओं का कहना है कि इस तरह के बयान करोड़ों हिंदुओं की आस्था को ठेस पहुंचाते हैं और इससे राजनीतिक माहौल को जानबूझकर गर्म किया जा रहा है।

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