महिलाओं को अब न्याय के लिए नहीं भटकना पड़ेगा, राष्ट्रीय महिला आयोग ने शुरू की ‘आयोग आपके द्वार’ पहल
महिलाओं को न्याय दिलाने की प्रक्रिया को सरल और सुलभ बनाने के उद्देश्य से राष्ट्रीय महिला आयोग ने ‘आयोग आपके द्वार’ पहल की शुरुआत की है। इस पहल के माध्यम से अब देश के किसी भी हिस्से में रहने वाली पीड़ित महिलाओं को न्याय के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। आयोग की टीम सीधे मौके पर पहुंचकर उनकी शिकायतों को सुनेंगी और संबंधित अधिकारियों के साथ मिलकर समस्याओं के समाधान की दिशा में कार्रवाई करेगी।
राष्ट्रीय महिला आयोग का उद्देश्य महिलाओं से जुड़े मामलों का त्वरित निस्तारण सुनिश्चित करना है, ताकि उन्हें लंबी कानूनी प्रक्रिया और कार्यालयों के चक्कर लगाने से राहत मिल सके। आयोग के अनुसार, इस पहल के जरिए अब तक देशभर में हजारों महिलाओं की शिकायतों का मौके पर ही समाधान किया जा चुका है।
500 जिलों में आयोजित हुई जनसुनवाई
हाल ही में दिल्ली में आयोजित एक कार्यशाला के दौरान राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष विजया रहाटकर ने बताया कि 9 से 14 मार्च के बीच देशभर के करीब 500 जिलों में जनसुनवाई कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन जनसुनवाई कार्यक्रमों में लगभग 15 हजार महिलाओं की समस्याओं का मौके पर ही निस्तारण किया गया।
उन्होंने कहा कि आयोग लगातार यह प्रयास कर रहा है कि महिलाओं से जुड़े मामलों को प्राथमिकता के आधार पर हल किया जाए और उन्हें जल्द न्याय मिल सके।
असंगठित क्षेत्र की महिलाओं के लिए भी बनी समितियां
राष्ट्रीय महिला आयोग ने पहली बार असंगठित क्षेत्र में कार्यरत महिलाओं की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश स्तर पर शिकायत एवं अन्वेषण समितियों का गठन किया है। इन समितियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर ही महिलाओं की शिकायतें दर्ज कर उनका समाधान करने की कोशिश की जाएगी।
इसके अलावा केंद्र शासित प्रदेशों में भी स्थानीय स्तर पर समितियों का गठन किया गया है। इन समितियों का कार्य ऐसे मामलों को दर्ज करना है जो किसी कारणवश आयोग तक नहीं पहुंच पाते थे। इसके बाद इन मामलों को आयोग तक पहुंचाया जाएगा, ताकि उन पर उचित कार्रवाई हो सके।
डीजीपी के साथ नियमित बैठक
महिलाओं से जुड़े मामलों की प्रभावी निगरानी के लिए राष्ट्रीय महिला आयोग की ओर से सभी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों (डीजीपी) के साथ हर तीन से चार महीने में बैठक आयोजित की जाती है। इन बैठकों में मामलों के निस्तारण की समीक्षा के साथ-साथ पुलिस अधिकारियों को पीड़ित महिलाओं के साथ संवेदनशील व्यवहार करने के लिए प्रशिक्षण भी दिया जाता है।
जटिल मामलों में आयोग करेगा हस्तक्षेप
राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष ने बताया कि जिन मामलों का समाधान स्थानीय स्तर पर नहीं हो पाता, उनमें आयोग स्वयं हस्तक्षेप करता है। आयोग की टीम मौके पर जाकर संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक करती है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाती है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में हिमाचल प्रदेश के एक मामले में आयोग की टीम मौके पर पहुंची और मामले के समाधान के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ बैठक की।
मौके पर सुनवाई कर होगा समाधान
नई व्यवस्था के तहत आयोग की टीम संबंधित क्षेत्र में जाकर कमिश्नर, जिलाधिकारी (डीएम), पुलिस अधीक्षक (एसपी) और पीड़िता को बुलाकर मामले की सुनवाई करेगी। इससे शिकायतों का समाधान तेजी से हो सकेगा और महिलाओं को न्याय के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
राष्ट्रीय महिला आयोग की ‘आयोग आपके द्वार’ पहल को महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा और त्वरित न्याय सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।