महाशिवरात्रि 2026: हर-हर महादेव के जयघोष से गूंजे शिवालय, जलाभिषेक के लिए उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब

देहरादून/उत्तराखंड।
शिव और शक्ति के पावन मिलन के पर्व महाशिवरात्रि 2026 पर देवभूमि उत्तराखंड शिवमय हो गई। तड़के से ही प्रदेशभर के शिवालयों में हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष गूंजने लगे। भगवान आशुतोष के जलाभिषेक के लिए हजारों श्रद्धालु सुबह से ही मंदिरों में कतारबद्ध नजर आए। देहरादून सहित हरिद्वार, ऋषिकेश और अन्य धार्मिक स्थलों के प्रमुख शिव मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी।

श्रद्धालुओं ने शिवलिंग पर गंगाजल, पंचामृत, दूध-दही-घी-शहद, सफेद पुष्प, बेलपत्र, आक के फूल और कमल से विधिवत पूजन-अर्चन किया। कई मंदिरों में भव्य सजावट की गई, वहीं श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा के लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता इंतजाम किए गए।

प्रदेश के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महाशिवरात्रि के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह पर्व शिव और शक्ति की आराधना का प्रतीक है, जो प्रेम, एकता और आध्यात्मिक जागरण की प्रेरणा देता है। उन्होंने सभी से सौहार्द और शांति के साथ पर्व मनाने का आह्वान किया।

🌙 शुभ योगों का दुर्लभ संयोग

इस वर्ष महाशिवरात्रि पर वर्षों बाद कई शुभ योग एक साथ बने हैं। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार कुंभ राशि में बुधादित्य, शुक्रादित्य, लक्ष्मी नारायण और चतुर्ग्रही योग के साथ-साथ सर्वार्थ सिद्धि, प्रीति, ध्रुव और व्यतिपात योग का विशेष संयोग बन रहा है। ग्रह-नक्षत्रों की यह स्थिति शिव उपासना के लिए अत्यंत फलदायी मानी जा रही है।

नारायण ज्योतिष संस्थान के आचार्य विकास जोशी के अनुसार, भगवान शिव की त्रिगुणात्मक सृष्टि के अनुरूप उनकी पूजा भी तीन प्रकार—सात्विक, राजसिक और तामसिक—बताई गई है। भक्त जिस भाव से शिव की आराधना करता है, उसी अनुरूप उसे फल प्राप्त होता है।

  • सात्विक पूजा में दूध, दही, घी, शहद, बेलपत्र, पुष्प, फल और मिठाई का अर्पण किया जाता है।
  • राजसिक पूजा में भांग, धतूरा, रुद्राक्ष और कमल पुष्प का प्रयोग होता है।
  • तामसिक/अघोर साधना में भस्म आरती और भस्म श्रृंगार से शिव को प्रसन्न किया जाता है।

आचार्य के अनुसार, महाशिवरात्रि की रात्रि में की गई हर प्रकार की शिव उपासना विशेष फल प्रदान करती है।

🗓️ तिथि और समय

फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी (रविवार) शाम 5:04 बजे से प्रारंभ होकर 16 फरवरी (सोमवार) शाम 5:34 बजे तक रहेगी। यह पावन रात्रि केवल व्रत और पूजन का अवसर ही नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना और शिव कृपा प्राप्त करने का दुर्लभ संयोग भी मानी जा रही है।

महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर प्रदेशभर में श्रद्धा, आस्था और भक्ति का अनुपम दृश्य देखने को मिला, जहां शिवभक्त पूरी निष्ठा के साथ भोलेनाथ की आराधना में लीन नजर आए। 🙏🕉️

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