माघ मेले को नफरत नहीं, भाईचारे का संदेश देना चाहिए: मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी

प्रयागराज/बरेली। प्रयागराज में चल रहे माघ मेले को लेकर साधु-संतों द्वारा मुसलमानों की एंट्री पर पाबंदी की मांग सामने आने के बाद इस मुद्दे पर धार्मिक और सामाजिक बहस तेज हो गई है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि माघ मेला जैसे आयोजनों का उद्देश्य समाज को जोड़ना होना चाहिए, न कि लोगों के बीच नफरत फैलाना।

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि माघ मेले की शुरुआत के साथ ही कुछ साधु-संतों की बैठकों में यह कहा गया कि मेले में मुसलमानों की एंट्री पर रोक लगाई जाएगी। उन्होंने इस मांग को इंसानियत के खिलाफ बताते हुए कहा कि ऐसे बयान समाज में विभाजन पैदा करते हैं और आपसी सौहार्द को नुकसान पहुंचाते हैं।

उन्होंने कहा कि धार्मिक मेले और त्योहार इंसानियत, मानवता और भाईचारे का संदेश देते हैं। लेकिन दुर्भाग्य से हर बड़े धार्मिक आयोजन के दौरान इस तरह की बयानबाजी सामने आती है, जिससे देश में नफरत का माहौल बनता है। मौलाना ने कहा कि साधु-संत और धर्मगुरु समाज के मार्गदर्शक होते हैं और उनका कर्तव्य है कि वे लोगों के दिलों को जोड़ें।

मौलाना बरेलवी ने आगे कहा कि इस तरह की भाषा और सोच भारत की गंगा-जमुनी तहजीब के खिलाफ है। उन्होंने साधु-संतों से अपील करते हुए कहा कि वे माघ मेले को समाज में प्रेम, भाईचारा और आपसी सद्भाव बढ़ाने का माध्यम बनाएं।

अंत में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने कहा कि मैं तमाम साधु-संतों से गुजारिश करता हूं कि वे लोगों में प्यार और मोहब्बत बांटें, इंसानियत और भाईचारे को बढ़ावा दें और भारत की साझा संस्कृति को मजबूत करें। माघ मेले से पूरे देश में सौहार्द और एकता का संदेश जाना चाहिए, न कि समाज को तोड़ने वाली बातें।

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