INSV Kaundinya: अरब सागर में स्वदेशी पोत का ऐतिहासिक सफर, ओमान यात्रा का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा पूरा

अरब सागर में भारतीय नौसेना के स्वदेशी पारंपरिक पोत आईएनएसवी कौण्डिन्य (INSV Kaundinya) ने अपनी ऐतिहासिक अंतरराष्ट्रीय यात्रा के दौरान ओमान की ओर बढ़ते हुए दो-तिहाई से अधिक सफर सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। खराब मौसम, तेज बारिश और बदलती हवाओं जैसी चुनौतियों के बावजूद चालक दल ने हौसले के साथ अभियान को आगे बढ़ाया।

इस ऐतिहासिक यात्रा में शामिल अर्थशास्त्री और प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य संजीव सान्याल ने यात्रा के 13वें दिन का अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि 12वें दिन के बाद जहाज को कई बार तेज बारिश का सामना करना पड़ा, जिससे पोत पर मौजूद अधिकांश सामान भीग गया। स्थानीय मौसम प्रणाली के कारण कुछ समय के लिए हवाएं कमजोर रहीं, लेकिन बाद में पूर्व दिशा से अनुकूल हवाएं फिर से चलने लगीं और यात्रा सुचारू रूप से आगे बढ़ सकी।

सान्याल ने कहा कि तमाम कठिनाइयों के बावजूद चालक दल को समुद्र के बीच एक मनोरम सूर्यास्त देखने का अवसर मिला, जिसने सभी का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने जानकारी दी कि पाल उठाते समय हल्की बारिश हो रही थी, लेकिन तब तक ओमान यात्रा का दो-तिहाई से अधिक हिस्सा तय किया जा चुका था।

आगे और कठिन होंगी चुनौतियां

संजीव सान्याल के अनुसार, आने वाले चरण में पोत को ऐसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिनसे प्राचीन समय के नाविकों को कभी जूझना नहीं पड़ा था। उन्होंने बताया कि जल्द ही आईएनएसवी कौण्डिन्य एक व्यस्त समुद्री मार्ग में प्रवेश करेगा, जहां तेल टैंकरों और बड़े कंटेनर जहाजों की भारी आवाजाही रहती है। आधुनिक समुद्री यातायात के बीच पारंपरिक पोत से सुरक्षित नौकायन एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है।

भारतीय समुद्री परंपरा का प्रतीक

उल्लेखनीय है कि आईएनएसवी कौण्डिन्य भारतीय नौसेना का स्वदेशी पोत है, जिसे पारंपरिक टंकाई (स्टिच्ड शिप) तकनीक से निर्मित किया गया है। यह पोत भारत की प्राचीन समुद्री विरासत और पारंपरिक नौकायन कौशल का प्रतीक माना जाता है।

आईएनएसवी कौण्डिन्य ने 29 दिसंबर को गुजरात के पोरबंदर से मस्कट (ओमान) के लिए अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू की थी। यह अभियान भारतीय नौसेना की क्षमताओं के साथ-साथ भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है।

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