Holi 2026: केमिकल वाले रंग बिगाड़ सकते हैं त्योहार की खुशियां, आंख और त्वचा रोग विशेषज्ञों ने दी चेतावनी

होली 2026: सावधान! रसायन युक्त रंगों से बढ़ सकता है एलर्जी और संक्रमण का खतरा, डॉक्टरों की लोगों से अपील

देहरादून। रंगों के पर्व होली को लेकर जहां लोगों में उत्साह का माहौल है, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने रसायन युक्त रंगों के इस्तेमाल को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। चिकित्सकों का कहना है कि केमिकल मिश्रित रंग आंखों और त्वचा को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं और त्योहार की खुशियों को परेशानी में बदल सकते हैं।

दून अस्पताल के नेत्र एवं त्वचा रोग विशेषज्ञों ने बताया कि हर वर्ष होली के बाद आंखों में एलर्जी, संक्रमण और त्वचा संबंधी समस्याओं के मरीजों की संख्या बढ़ जाती है। ऐसे में लोगों को सुरक्षित और प्राकृतिक रंगों का उपयोग करने की सलाह दी जा रही है।

आंखों के लिए खतरनाक साबित हो सकते हैं केमिकल रंग

दून अस्पताल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. नीरज सारस्वत ने बताया कि रसायन युक्त रंग आंखों में जाने से एलर्जिक रिएक्शन का खतरा बढ़ जाता है। इसका सबसे अधिक प्रभाव आंखों के कॉर्निया और कंजेक्टिवाइटा पर पड़ता है।

उन्होंने बताया कि यदि रंग के कण आंखों के अंदर चले जाएं और व्यक्ति आंखों को रगड़ ले, तो आंखों में घाव तक हो सकता है। आंखों में जलन, लालिमा, खुजली और पानी आना इसके शुरुआती लक्षण हैं। ऐसी स्थिति में तुरंत आंखों को साफ पानी से धोना चाहिए और समस्या बढ़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

त्वचा पर एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्माटाइटिस का खतरा

विशेषज्ञों के अनुसार, केमिकल युक्त रंग त्वचा पर लगने से एलर्जिक कॉन्टैक्ट डर्माटाइटिस (ACD) हो सकता है। इससे त्वचा पर लाल चकत्ते, खुजली, जलन और त्वचा के छिलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। संवेदनशील त्वचा वाले लोगों और बच्चों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।


आंखों की सुरक्षा के लिए अपनाएं ये उपाय

  • हर्बल और प्राकृतिक रंगों से होली खेलें
  • आंखों की सुरक्षा के लिए चश्मा पहनें
  • रंग जाने पर आंखों को साफ पानी से धोएं
  • आंखों को मसलने से बचें

त्वचा को सुरक्षित रखने के लिए करें ये तैयारी

  • होली खेलते समय शरीर को पूरी तरह ढककर रखें
  • त्वचा पर पहले से मॉइस्चराइजर या तेल लगाएं
  • बच्चों को पक्के और रसायन युक्त रंगों से दूर रखें

चिकित्सकों का कहना है कि थोड़ी सी जागरूकता और सावधानी अपनाकर होली को सुरक्षित, स्वस्थ और आनंददायक बनाया जा सकता है। प्राकृतिक रंगों का उपयोग स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बेहतर विकल्प माना जाता है।

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