हरिद्वार भूमि घोटाला: विजिलेंस जांच पूरी, तत्कालीन SDM समेत तीन अफसरों पर कार्रवाई की सिफारिश

हरिद्वार। हरिद्वार के चर्चित भूमि घोटाले में विजिलेंस जांच पूरी हो चुकी है। जांच में तहसील हरिद्वार के तत्कालीन एसडीएम समेत तीन अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। विजिलेंस ने अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपते हुए इन अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की सिफारिश कर दी है। अब शासन स्तर पर जांच रिपोर्ट का गहन अध्ययन किया जा रहा है।

विजिलेंस जांच में सामने आया है कि तहसील हरिद्वार में भूमि से जुड़े परवाने (भूमि हस्तांतरण या बंदोबस्त की पुष्टि करने वाले प्रमाणपत्र) आवेदकों तक पहुंचाने में असामान्य तेजी दिखाई गई। इसके साथ ही धारा-143 उत्तर प्रदेश जमींदारी विनाश एवं भूमि सुधार अधिनियम (भू-उपयोग परिवर्तन की प्रक्रिया) के मामलों में भी नियमों का पालन नहीं किया गया। विजिलेंस का कहना है कि धारा-143 सामान्य रूप से एक रूटीन प्रक्रिया है, लेकिन तत्कालीन अधिकारियों और कर्मचारियों ने नियमों की अनदेखी करते हुए लापरवाही बरती।

54 करोड़ की जमीन खरीद से उजागर हुआ घोटाला

पूरा मामला वर्ष 2024 में तब सामने आया, जब नगर निगम हरिद्वार ने ग्राम सराय क्षेत्र में कूड़े के ढेर के पास स्थित अनुपयुक्त 2.3070 हेक्टेयर भूमि को करीब 54 करोड़ रुपये में खरीद लिया। भूमि की गुणवत्ता और कीमत को लेकर सवाल उठे तो मामला शासन तक पहुंचा और जांच के आदेश दिए गए।

घोटाले के उजागर होने के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सख्त रुख अपनाते हुए दो आईएएस, एक पीसीएस समेत कुल 12 आरोपियों को निलंबित कर दिया था। इसके बाद 3 जून 2025 को शासन ने औपचारिक रूप से विजिलेंस जांच का पत्र निदेशक विजिलेंस को भेजा।

शासन को सौंपी गई जांच रिपोर्ट

विजिलेंस ने खुली जांच के दौरान सभी संबंधित दस्तावेजों, फाइलों और प्रक्रियाओं की पड़ताल की। जांच पूरी होने के बाद निदेशक विजिलेंस डॉ. वी. मुरुगेशन की ओर से रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि तहसील स्तर पर नियमों की अनदेखी कर भूमि से जुड़े मामलों को निस्तारित किया गया, जिससे सरकारी कार्यप्रणाली की पारदर्शिता पर प्रश्न खड़े हुए हैं।

SDM के खिलाफ विभागीय जांच जारी

प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने के आधार पर तत्कालीन एसडीएम अजयवीर सिंह (निलंबित) के खिलाफ उत्तराखंड सरकारी सेवक (अनुशासन एवं अपील) नियमावली, 2003 के तहत विभागीय कार्रवाई पहले से ही चल रही है। उन्हें आरोपपत्र जारी कर अपना पक्ष रखने का अवसर दिया गया था। 16 सितंबर को उन्होंने लिखित जवाब दाखिल करते हुए सभी आरोपों से इनकार किया है।

इस पूरे प्रकरण की विभागीय जांच शासन ने अपर सचिव डॉ. आनंद श्रीवास्तव को सौंपी है। अब विजिलेंस रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई और दोषियों पर अंतिम निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा।

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