हरिद्वार (उत्तराखंड):
धर्मनगरी हरिद्वार आने वाले देश-विदेश के श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए एक बड़ी सौगात मिलने जा रही है। अब गंगा के पावन घाटों के दर्शन के साथ-साथ श्रद्धालु मां गंगा के पौराणिक, धार्मिक और सांस्कृतिक इतिहास को भी नजदीक से देख और समझ सकेंगे। नगर निगम हरिद्वार की पहल पर देवपुरा चौक स्थित निगम की भूमि पर भव्य गंगा म्यूजियम का निर्माण किया जाएगा, जिसे शासन से मंजूरी मिल चुकी है।
करीब 10 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनने वाले इस गंगा म्यूजियम में गंगा अवतरण से लेकर कुंभ मंथन, राजा भगीरथ की तपस्या और भगवान शिव की विविध लीलाओं का सजीव चित्रण किया जाएगा। नगर निगम ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगामी कुंभ मेले से पहले पूरा करने का लक्ष्य तय किया है, ताकि कुंभ के दौरान आने वाले लाखों श्रद्धालु इसका लाभ उठा सकें।
तीन मंजिलों में विकसित होगा गंगा म्यूजियम
देवपुरा चौक स्थित नगर निगम की भूमि पर बनने वाले म्यूजियम भवन के सबसे निचले तल पर श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए पार्किंग की सुविधा विकसित की जाएगी। इसके ऊपर तीन मंजिलों में गंगा म्यूजियम बनाया जाएगा, जहां आधुनिक तकनीक के माध्यम से गंगा से जुड़ी पौराणिक कथाओं, धार्मिक घटनाओं और ऐतिहासिक महत्व को प्रदर्शित किया जाएगा।
पौराणिक कथाओं और स्थलों का सजीव प्रदर्शन
गंगा म्यूजियम में कुंभ मंथन, गंगा अवतरण, भगीरथ की तपस्या, दक्ष प्रजापति प्रसंग, देवी सती की कथा, भगवान शिव की लीलाएं, पांडवों से जुड़े प्रसंग, गंगा की सात धाराओं से निर्मित सप्त सरोवर, मच्छला कुंड और ब्रह्मकुंड जैसे पौराणिक स्थलों का सजीव चित्रण किया जाएगा।
इसके साथ ही चंडी देवी, मनसा देवी, श्री दक्षिण काली, शीतला माता, सुरेश्वरी देवी और मायादेवी समेत हरिद्वार के प्रमुख मंदिरों का धार्मिक महत्व भी म्यूजियम में दर्शाया जाएगा। कांवड़ यात्रा के इतिहास और हरकी पैड़ी के महत्व को भी विस्तार से प्रस्तुत किया जाएगा।
शासन की स्वीकृति, पेयजल निगम को जिम्मेदारी
मेयर किरण जैसल के प्रस्ताव पर शासन ने गंगा म्यूजियम निर्माण को मंजूरी देते हुए 10 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि जारी कर दी है। इस परियोजना की कार्यदायी संस्था पेयजल निगम को बनाया गया है। मार्च माह से निर्माण कार्य शुरू कर कुंभ से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
नगर निगम की भूमि का होगा सदुपयोग
इस परियोजना से नगर निगम की बेशकीमती भूमि का सदुपयोग सुनिश्चित होगा। लंबे समय से इस जमीन पर भूमाफियाओं की नजर बनी हुई थी, लेकिन अब यहां पार्किंग और गंगा म्यूजियम का निर्माण कर इसे सुरक्षित और उपयोगी बनाया जाएगा।
2010 के कुंभ में अधूरी रह गई थी योजना
गौरतलब है कि वर्ष 2010 के महाकुंभ के दौरान भी गंगा म्यूजियम के निर्माण की योजना बनी थी और स्थान भी चिह्नित किया गया था, लेकिन यह योजना उस समय साकार नहीं हो सकी। अब वर्षों बाद यह सपना पूरा होने जा रहा है।
मेयर किरण जैसल ने कहा कि गंगा म्यूजियम बनने से स्थानीय लोगों के साथ-साथ श्रद्धालु और पर्यटक मां गंगा के पौराणिक इतिहास से परिचित हो सकेंगे। हरिद्वार चारधाम का प्रवेश द्वार है और यह म्यूजियम नई पीढ़ी को अपने धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने में अहम भूमिका निभाएगा।