Gangster Murder: ताइक्वांडो ट्रेनर से अपराध का सरगना बना विक्रम शर्मा, देहरादून में हत्या के बाद उजागर हुई पूरी आपराधिक दास्तान

देहरादून/जमशेदपुर।
Dehradun में झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर विक्रम शर्मा की हत्या के बाद उसके आपराधिक नेटवर्क और बीते दो दशकों की गतिविधियों पर एक बार फिर से चर्चा तेज हो गई है। ताइक्वांडो सिखाने से शुरुआत करने वाला विक्रम समय के साथ अपराध की दुनिया का ऐसा मास्टरमाइंड बन गया, जिसका नाम झारखंड के कई बड़े हत्याकांडों, फायरिंग और बम धमाकों में साजिशकर्ता के तौर पर दर्ज रहा।

उत्तराखंड से झारखंड तक का सफर

विक्रम शर्मा मूल रूप से उत्तराखंड का निवासी था। उसके पिता अमित लाल नौकरी के सिलसिले में Jamshedpur पहुंचे थे। विक्रम को बचपन से ही ताइक्वांडो का शौक था और वह बीएमपी ग्राउंड में युवाओं को प्रशिक्षण दिया करता था। यहीं उसकी पहचान झारखंड के कुख्यात अपराधी अखिलेश सिंह से हुई, जो उस समय उसका शिष्य था।
विक्रम का छोटा भाई अरविंद शर्मा अखिलेश का घनिष्ठ मित्र था, जिससे दोनों परिवारों के बीच नजदीकी रिश्ते बन गए।

अपराध की दुनिया में पहला कदम

साल 1999 में तेल कारोबारी ओम प्रकाश काबरा के अपहरण कांड के दौरान विक्रम पहली बार पुलिस के रडार पर आया। इस मामले में पुलिस ने उसके घर छापा मारा, जो उसके आपराधिक जीवन की शुरुआत माना जाता है।
छापेमारी के दौरान पुलिस को पिंकी की तस्वीर मिली, जो कारोबारी अशोक शर्मा की पत्नी थी। इससे पहले 1998 में विक्रम के भाई अरविंद शर्मा ने अशोक शर्मा की हत्या कर दी थी। बाद में अरविंद ने पिंकी से शादी कर ली। यह मामला आज भी पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है, क्योंकि अरविंद अब तक फरार है।

हत्याएं, फायरिंग और बम धमाके

ओम प्रकाश काबरा कांड के बाद विक्रम शर्मा का नाम लगातार संगीन अपराधों में सामने आता रहा। Tata Steel के सुरक्षा अधिकारी जयराम की हत्या और बम धमाके की घटनाओं में भी वह साजिशकर्ता के तौर पर सामने आया। इन वारदातों को उसने अखिलेश सिंह के साथ मिलकर अंजाम दिया। फिलहाल अखिलेश सिंह Dumka की जेल में बंद है।

इन मामलों में भी विक्रम की भूमिका बताई जाती है—

  • श्री लेदर्स के मालिक आशीष डे की हत्या
  • रवि चौरसिया पर फायरिंग
  • पूर्व जज आर.पी. रवि पर गोलीबारी
  • कांग्रेस नेता नट्टू झा के कार्यालय पर फायरिंग

राजनीति, प्रेस और पुलिस में पैठ

सूत्रों के मुताबिक, विक्रम शर्मा ‘थ्री-पी’ यानी पॉलिटिशियन, प्रेस और पुलिस—तीनों से अपने संबंध साधने में माहिर था। झारखंड के कई प्रभावशाली नेताओं से उसकी नजदीकियां बताई जाती हैं। जानकारी के अनुसार, वह आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारी भी कर रहा था और इसकी जिम्मेदारी उसने जेल में बंद अखिलेश सिंह को सौंपी थी, जो भीतर से ही नेटवर्क संभाल रहा था।

न्यूज पोर्टल और रंगदारी के आरोप

झारखंड पुलिस सूत्रों का कहना है कि विक्रम शर्मा एक न्यूज पोर्टल भी संचालित करता था, जिसमें उसके कुछ साझेदार शामिल थे। आरोप है कि वह इस पोर्टल और अपने रसूख का इस्तेमाल कर लोगों को ब्लैकमेल करता और उनसे रंगदारी वसूलता था। आम लोगों और कारोबारियों में उसका इस कदर खौफ था कि उसके खिलाफ खुलकर बोलने की हिम्मत कम ही लोग जुटा पाते थे।

देहरादून में हत्या, जांच जारी

कई बार विक्रम शर्मा की मौत की अफवाहें फैलीं, लेकिन हर बार वह नए अपराधों के साथ सामने आया। अब Dehradun में उसकी हत्या ने पूरे मामले को नए सिरे से खोल दिया है। पुलिस और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि यह हत्या गैंगवार का नतीजा है या किसी पुराने विवाद का हिसाब।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *