देहरादून में गैस सिलिंडर की किल्लत से चाय का कारोबार प्रभावित, शिकंजी और गन्ने का जूस बेचकर गुजारा कर रहे छोटे व्यापारी

देहरादून: गैस किल्लत से चाय की ठेलियां पड़ी सूनी, छोटे दुकानदारों ने बदला कारोबार

देहरादून में गैस सिलिंडर की किल्लत का असर अब छोटे व्यापारियों के कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। शहर के विभिन्न इलाकों में चाय की ठेलियां और टपरियां, जो पहले दिनभर ग्राहकों से गुलजार रहती थीं, अब गैस की कमी के कारण ठप पड़ती जा रही हैं। ऐसे में कई चाय विक्रेताओं को अपना कारोबार बदलना पड़ा है और वे अब शिकंजी तथा गन्ने का जूस बेचकर किसी तरह अपना गुजारा कर रहे हैं।

दरअसल, गैस सिलिंडर की बढ़ती कीमत और समय पर उपलब्धता न होने से चाय बनाना छोटे दुकानदारों के लिए मुश्किल होता जा रहा है। चाय का पूरा कारोबार गैस पर निर्भर होने के कारण सिलिंडर न मिलने की स्थिति में दुकान चलाना लगभग असंभव हो गया है। इस वजह से कई छोटे व्यापारियों ने वैकल्पिक काम शुरू कर दिया है।

20 दिनों से बंद पड़ा चाय का कारोबार

प्रिंस चौक क्षेत्र में ठेली लगाने वाले रौशन बताते हैं कि पिछले करीब 20 दिनों से उनका चाय का कारोबार पूरी तरह बंद पड़ा है। उन्होंने बताया कि गैस सिलिंडर उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं और बुकिंग भी नहीं हो रही है। चाय बनाना पूरी तरह गैस पर निर्भर होने के कारण उन्होंने मजबूरी में शिकंजी का स्टॉल लगाना शुरू कर दिया है, ताकि किसी तरह घर का खर्च चल सके।

सिलिंडर खत्म, अब बिस्कुट और नमकीन का सहारा

वहीं राजपुर क्षेत्र में टपरी चलाने वाले राकेश का कहना है कि उनका गैस सिलिंडर खत्म हुए एक सप्ताह से ज्यादा समय हो गया है, लेकिन अब तक नया सिलिंडर नहीं मिल पाया है। गैस न होने की वजह से उन्होंने चाय बनाना बंद कर दिया है और फिलहाल केवल बिस्कुट व नमकीन बेचकर गुजारा कर रहे हैं। कई अन्य टपरी संचालकों ने भी गन्ने के जूस की ठेलियां लगाकर अपना काम जारी रखने की कोशिश शुरू कर दी है।

कुछ दुकानदारों को बंद करनी पड़ी दुकान

स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कुछ छोटे दुकानदारों को अपनी टपरियां बंद करने की नौबत भी आ गई है। पटेल नगर क्षेत्र के एक टपरी संचालक ने बताया कि गैस सिलिंडर न मिलने के कारण उनका काम पूरी तरह ठप हो गया, जिसके चलते उन्हें अपनी दुकान बंद करनी पड़ी। इससे उनकी आय पर सीधा असर पड़ा है।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि जल्द ही गैस आपूर्ति की समस्या का समाधान नहीं किया गया तो छोटे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति और खराब हो सकती है। फिलहाल कई दुकानदार गर्मी के मौसम को देखते हुए शिकंजी और गन्ने के जूस जैसे विकल्पों के सहारे अपनी आजीविका चलाने की कोशिश कर रहे हैं।

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