साइबर हमले के बाद भी विभागों की लापरवाही: 31 मार्च तक सुरक्षा ऑडिट नहीं कराया तो बंद होंगी वेबसाइट और मोबाइल एप

प्रदेश में अक्टूबर 2024 में हुए सबसे बड़े साइबर हमले के बावजूद कई सरकारी विभाग अब भी साइबर सुरक्षा को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। तीन अक्तूबर 2024 को हुए इस साइबर अटैक के कारण राज्य सरकार की कई महत्वपूर्ण वेबसाइटें और ऑनलाइन सेवाएं करीब 10 दिनों तक पूरी तरह बंद रहीं, जिससे प्रशासनिक कामकाज और आम लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा।

साइबर हमले के बाद सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से सूचना प्रौद्योगिकी विकास एजेंसी (आईटीडीए) ने साइबर सुरक्षा से जुड़े मानकों में बदलाव करते हुए सभी विभागों को अपनी वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशनों का साइबर सुरक्षा ऑडिट कराने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद कई विभागों ने अब तक इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया है।

आईटीडीए के अधिकारियों के अनुसार, बार-बार पत्र भेजने के बाद भी जब विभागों ने आवश्यक जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, तो अब सख्त निर्णय लिया गया है। आईटीडीए ने सभी सचिवों और विभागाध्यक्षों को कड़ा पत्र जारी कर साफ किया है कि 31 मार्च 2026 तक जिन विभागों की वेबसाइटों और मोबाइल एप्लिकेशनों का सुरक्षा ऑडिट पूरा नहीं होगा, उनकी सेवाएं स्टेट डाटा सेंटर से बंद कर दी जाएंगी।

पत्र में कहा गया है कि साइबर सुरक्षा की दृष्टि से स्टेट डाटा सेंटर में होस्ट की गई सभी वेबसाइटों और एप्लिकेशनों का ऑडिट अनिवार्य है। इसके लिए विभागों को अपनी वेबसाइट की लॉगिन क्रेडेंशियल, तकनीकी विवरण और एप्लिकेशन का तकनीकी व कार्यात्मक वॉकथ्रू उपलब्ध कराना होगा, ताकि समय रहते साइबर सिक्योरिटी ऑडिट कराया जा सके।

निजी एजेंसियों से बनी वेबसाइटें बनीं समस्या

आईटीडीए ने यह भी बताया कि कई विभागों ने पूर्व में निजी व्यक्तियों या एजेंसियों से अपनी वेबसाइट और मोबाइल एप विकसित कराए थे। अब उन विकासकर्ताओं का कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। इस कारण वेबसाइटों और एप्स से जुड़ी तकनीकी जानकारी भी विभागों के पास नहीं है, जिससे ऑडिट प्रक्रिया में गंभीर दिक्कतें आ रही हैं।

केंद्र सरकार के निर्देशों का पालन जरूरी

इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत राज्य के सभी सरकारी वेब पोर्टल्स और मोबाइल एप्लिकेशनों का साइबर सुरक्षा ऑडिट कराना अनिवार्य है। बढ़ते साइबर खतरों को देखते हुए राज्य की डिजिटल अवसंरचना को सुरक्षित रखना सरकार की प्राथमिकता है। राज्य साइबर आपातकालीन प्रतिक्रिया दल के माध्यम से यह ऑडिट कराया जाएगा, ताकि डाटा चोरी और हैकिंग जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।

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