जनगणना 2026: उत्तराखंड की सीमाएं सील, गृह मंत्रालय की अधिसूचना जारी; 25 अप्रैल से शुरू होगा पहला चरण

उत्तराखंड में आगामी जनगणना की प्रक्रिया को लेकर औपचारिक तैयारी शुरू हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से जनगणना की अधिसूचना जारी होते ही राज्य की प्रशासनिक और भौगोलिक सीमाएं सील कर दी गई हैं। अब जनगणना पूर्ण होने तक प्रदेश में किसी भी जिले, तहसील, नगर निगम, नगर पालिका, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत या वार्ड की सीमाओं में कोई परिवर्तन नहीं किया जा सकेगा।

अधिसूचना लागू होने के बाद राज्य सरकार नए नगर निकायों के गठन का निर्णय नहीं ले सकेगी। इसके साथ ही किसी भी गांव को नगर निगम, नगर पालिका या नगर पंचायत में शामिल करने की प्रक्रिया पर भी पूरी तरह रोक रहेगी। अधिकारियों के मुताबिक, जनगणना के दौरान सीमाओं का स्थिर रहना बेहद आवश्यक है, ताकि जनसंख्या के आंकड़े सटीक और विश्वसनीय तैयार किए जा सकें। यदि इस अवधि में सीमाओं में बदलाव होता है तो आंकड़ों में गड़बड़ी और मिसमैच की संभावना बढ़ जाती है।

प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि सीमाएं सील होने से आम जनता को मिलने वाली सरकारी सेवाओं, विकास योजनाओं और रोजमर्रा के प्रशासनिक कार्यों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। यह व्यवस्था केवल जनगणना से जुड़े प्रशासनिक ढांचे तक सीमित रहेगी।

25 अप्रैल से शुरू होगा पहला चरण

जनगणना का पहला चरण 25 अप्रैल 2026 से शुरू होकर 24 मई 2026 तक चलेगा। इस चरण में मकानों का सूचीकरण और मकान गणना की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की जनसंख्या गणना की तैयारी की जाएगी।

बर्फबारी वाले क्षेत्रों में सितंबर में होगी गणना

उत्तराखंड के बर्फबारी से प्रभावित और दुर्गम क्षेत्रों में जनसंख्या गणना 11 से 30 सितंबर 2026 के बीच की जाएगी। इन इलाकों में सर्दियों के दौरान भारी बर्फबारी के कारण लोग निचले क्षेत्रों की ओर पलायन कर जाते हैं, इसलिए सितंबर का समय गणना के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है।

तीन चरणों में पूरी होगी जनगणना

  • पहला चरण: 25 अप्रैल से 24 मई 2026 – मकान सूचीकरण एवं गणना
  • दूसरा चरण: 11 से 30 सितंबर 2026 – स्नोबाउंड (बर्फबारी वाले) क्षेत्रों में जनसंख्या गणना
  • तीसरा चरण: 9 से 28 फरवरी 2027 – अन्य क्षेत्रों में देशभर के साथ जनगणना

16 फरवरी से शुरू होगा प्रशिक्षण कार्यक्रम

जनगणना की तैयारियों के तहत 16 फरवरी से चार्ज अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू किया जाएगा। इस दौरान 23 कर्मचारियों को मास्टर ट्रेनर के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रदेशभर में 555 कर्मचारियों को फील्ड ट्रेनर बनाया जाएगा, जो आगे लगभग 4,000 सुपरवाइजरों को प्रशिक्षण देंगे। इसके बाद ये सुपरवाइजर और फील्ड ट्रेनर मिलकर करीब 30,000 कर्मचारियों को जनगणना कार्य के लिए प्रशिक्षित करेंगे।

25 मार्च से 7 अप्रैल के बीच 30,000 कर्मचारियों और 4,000 सुपरवाइजरों को चरणबद्ध तरीके से प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रत्येक बैच में 40 कर्मचारियों को तीन दिन का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

जनगणना कार्य निदेशालय, उत्तराखंड की निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि अधिसूचना जारी होने के साथ ही प्रदेश की सभी प्रशासनिक सीमाएं सील कर दी गई हैं और यह व्यवस्था जनगणना पूरी होने तक लागू रहेगी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष, पारदर्शी और सटीक जनगणना आंकड़े जुटाने के लिए यह कदम बेहद जरूरी है।

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