देहरादून।
उत्तराखंड के बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में कथित वीआईपी की संलिप्तता और साक्ष्य छिपाने के आरोपों की जांच अब केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) करेगी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर राज्य शासन ने प्रकरण से संबंधित समस्त दस्तावेज सीबीआई को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। गढ़वाल परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) राजीव स्वरूप ने शनिवार को प्रेस वार्ता में यह जानकारी दी।
आईजी राजीव स्वरूप ने बताया कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की जांच राज्य पुलिस द्वारा प्रारंभ से ही पूरी गंभीरता और जिम्मेदारी के साथ की गई थी। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए वरिष्ठ महिला आईपीएस अधिकारी के नेतृत्व में विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई थी। एसआईटी ने गहन जांच के बाद ठोस साक्ष्य जुटाए और तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा। प्रभावी विवेचना और मजबूत पैरवी के चलते न्यायालय ने तीनों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है और अब तक किसी भी आरोपी को जमानत नहीं मिल पाई है।
वीआईपी विवाद की जांच अब केंद्रीय एजेंसी को
आईजी ने स्पष्ट किया कि हत्याकांड में वीआईपी कनेक्शन को लेकर सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर उठ रहे सवालों को देखते हुए सरकार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच का निर्णय लिया है। इसी क्रम में अब यह मामला सीबीआई को सौंपा जा रहा है, ताकि किसी भी प्रकार की शंका या संदेह का पूरी तरह समाधान किया जा सके। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में किसी भी स्तर पर कुछ भी छिपाना नहीं चाहती।
उन्होंने यह भी बताया कि मुख्यमंत्री ने स्वयं अंकिता भंडारी के माता-पिता से संवाद कर उन्हें आश्वस्त किया है कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे। सीबीआई जांच के बाद यदि कोई नया तथ्य या साक्ष्य सामने आता है, तो उस पर भी कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी।
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर दर्ज एफआईआर
पुलिस महानिरीक्षक ने बताया कि पद्मभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी की तहरीर पर देहरादून के बसंत विहार थाने में शुक्रवार देर रात प्राथमिकी दर्ज की गई है। इस एफआईआर में मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर जांच केंद्रित की गई है—पहला, उन अज्ञात व्यक्ति या व्यक्तियों की पहचान, जिन्हें वीआईपी कहा जा रहा है; और दूसरा, हत्याकांड से जुड़े साक्ष्यों को छिपाने या नष्ट करने के आरोप।
डॉ. जोशी ने अपनी शिकायत में उल्लेख किया है कि भले ही अंकिता भंडारी हत्याकांड में दोषियों को सजा मिल चुकी है, लेकिन सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर यह आरोप लगातार सामने आ रहे हैं कि मामले में कुछ महत्वपूर्ण साक्ष्य छिपाए या नष्ट किए गए। ऐसे में कथित वीआईपी से जुड़े तथ्यों की स्वतंत्र जांच पूर्ण न्याय सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक है।
जनता से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील
आईजी राजीव स्वरूप ने जनता से अपील की कि वे सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों और अफवाहों पर विश्वास न करें। यदि किसी के पास इस मामले से जुड़ा कोई भी ठोस या गुप्त साक्ष्य है, तो वह सीधे जांच एजेंसी को उपलब्ध कराए। उन्होंने कहा कि सीबीआई जांच के बाद इस संवेदनशील मामले से जुड़े सभी सवालों पर स्पष्टता आएगी और सच्चाई सामने आएगी।