देहरादून। चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं को हेलिकॉप्टर टिकट, वीआईपी दर्शन और कन्फर्म बुकिंग का झांसा देकर ठगी करने वाले एक संगठित साइबर गिरोह का उत्तराखंड स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने भंडाफोड़ किया है। लंबे समय तक चली तकनीकी जांच और डिजिटल निगरानी के बाद एसटीएफ ने बिहार के नालंदा जिले से गिरोह के दो प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि आरोपी फर्जी वेबसाइटों, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और व्हाट्सएप के जरिए देशभर के श्रद्धालुओं को निशाना बना रहे थे।
चारधाम यात्रा के दौरान साइबर अपराधों पर नजर रखने के लिए गठित एसटीएफ की एंटी हेली फ्रॉड सेल ने करीब डेढ़ महीने तक विभिन्न डिजिटल माध्यमों की निगरानी की। इस दौरान 143 संदिग्ध यूआरएल, फर्जी वेबसाइटों और 27 व्हाट्सएप नंबरों की जांच की गई। एसटीएफ ने अब तक 300 से अधिक फर्जी सोशल मीडिया लिंक और 100 से ज्यादा संदिग्ध व्हाट्सएप नंबरों को ब्लॉक भी कराया है।
आईआरसीटीसी जैसी वेबसाइट बनाकर श्रद्धालुओं को फंसाते थे ठग
जांच में पता चला कि साइबर ठग आईआरसीटीसी की आधिकारिक वेबसाइट से मिलते-जुलते यूआरएल तैयार कर नकली पोर्टल संचालित कर रहे थे। गूगल सर्च पर विज्ञापन देकर इन वेबसाइटों को ऊपर दिखाया जाता था, जिससे श्रद्धालु इन्हें असली वेबसाइट समझ लेते थे। इसके बाद ठग हेलिकॉप्टर टिकट और वीआईपी दर्शन की बुकिंग का भरोसा दिलाकर व्हाट्सएप के माध्यम से संपर्क करते और फर्जी क्यूआर कोड भेजकर भुगतान करवा लेते थे।
एसटीएफ के अनुसार, चारधाम यात्रा से जुड़ी साइबर ठगी के 134 से अधिक मामलों का पंजीकरण हो चुका है। जांच के दौरान ठगी में इस्तेमाल किए जा रहे कई बैंक खातों और मोबाइल नंबरों को भी फ्रीज किया गया है।
इस तरह संचालित होता था ठगी का पूरा नेटवर्क
गिरोह के सदस्य खुद को अधिकृत हेलिकॉप्टर सेवा प्रदाता, ट्रैवल एजेंट या बुकिंग प्रतिनिधि बताकर लोगों का विश्वास जीतते थे। इसके लिए फर्जी मोबाइल नंबर, नकली सोशल मीडिया पेज और वेबसाइटों का इस्तेमाल किया जाता था।
श्रद्धालुओं को सीमित सीट, तत्काल कन्फर्म टिकट और वीआईपी दर्शन जैसे आकर्षक ऑफर देकर जल्द भुगतान करने के लिए प्रेरित किया जाता था। एक बार पैसा जमा होने के बाद ठग संपर्क तोड़ देते थे और पीड़ितों को धोखाधड़ी का पता चलता था।
म्यूल अकाउंट के जरिए ठगी की रकम की निकासी
जांच में यह भी सामने आया कि गिरोह विभिन्न व्यक्तियों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनका इस्तेमाल म्यूल अकाउंट के रूप में करता था। ठगी से प्राप्त रकम इन खातों में जमा कराई जाती थी और बाद में एटीएम के माध्यम से नकद निकाली जाती थी। गिरोह के सदस्यों के बीच ठगी की रकम पर 15 से 25 प्रतिशत तक कमीशन का बंटवारा किया जाता था।
एनसीआरपी शिकायतों से जुड़े मिले सबूत
गिरफ्तार आरोपियों से जुड़े बैंक खातों की जांच में राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर दर्ज कई शिकायतों का लिंक मिला है। पुलिस को व्हाट्सएप चैट, बैंक खातों, एटीएम कार्ड और क्यूआर कोड के आदान-प्रदान से जुड़े महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य भी प्राप्त हुए हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि गिरोह का नेटवर्क कई राज्यों में फैला हुआ है और इसके अन्य सदस्य अभी भी फरार हैं।
श्रद्धालुओं के लिए एसटीएफ की चेतावनी
एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि हेलिकॉप्टर टिकट और अन्य यात्रा सेवाओं की बुकिंग केवल अधिकृत और आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ही करें। किसी भी अनजान लिंक, सोशल मीडिया विज्ञापन, व्हाट्सएप नंबर या फर्जी एजेंट के झांसे में न आएं।
उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति साइबर ठगी का शिकार होता है तो तत्काल राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराए या नजदीकी साइबर थाने से संपर्क करे, ताकि समय रहते कार्रवाई कर नुकसान को कम किया जा सके।