देहरादून। उत्तराखंड में चल रही डिजिटल भवन स्व-गणना प्रक्रिया का शुक्रवार को अंतिम दिन है। इसके बाद 25 अप्रैल से राज्यभर में जनगणना का अगला चरण शुरू होगा, जिसमें प्रगणकों की टीमें घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और गणना का कार्य करेंगी। जनगणना निदेशालय ने इस अभियान के लिए सभी व्यवस्थाएं पूरी कर ली हैं।
प्रदेश में 10 अप्रैल से डिजिटल स्व-गणना की शुरुआत की गई थी, जिसके तहत नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का विकल्प दिया गया। अब तक करीब 56 हजार लोग घर बैठे अपनी स्व-गणना पूरी कर चुके हैं और उन्हें सेल्फ एन्यूमरेशन (SE) आईडी भी जारी कर दी गई है।
जिलों के अनुसार देखें तो देहरादून में सबसे अधिक 9,627 लोगों ने स्व-गणना कराई है। इसके अलावा नैनीताल में 8,255, हरिद्वार में 6,410, ऊधमसिंह नगर में 5,471, अल्मोड़ा में 4,294, बागेश्वर में 3,839, चंपावत में 3,200, पिथौरागढ़ में 2,963, पौड़ी में 2,895, टिहरी में 2,570, चमोली में 2,510, उत्तरकाशी में 2,653 और रुद्रप्रयाग में 1,330 लोगों ने इस सुविधा का लाभ उठाया है।
जनगणना के पहले चरण के तहत 25 अप्रैल से 24 मई तक घर-घर सर्वेक्षण किया जाएगा। इसके लिए प्रदेश में कुल 30,839 कर्मचारियों की तैनाती की गई है, जिनमें 4,491 सुपरवाइजर और 26,348 प्रगणक शामिल हैं।
जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि जिन नागरिकों ने पहले ही डिजिटल माध्यम से स्व-गणना कर ली है, उनके घर भी प्रगणक पहुंचेंगे। वे एसई आईडी लेकर सिस्टम में उसका सत्यापन करेंगे और मौके पर ही दर्ज जानकारी का मिलान कर अंतिम रूप से डेटा फीड करेंगे।
वहीं, जिन लोगों ने अब तक स्व-गणना नहीं की है, उनसे प्रगणक 33 प्रश्नों के माध्यम से आवश्यक जानकारी एकत्र करेंगे। इसके बाद ही उनकी भवन गणना की प्रक्रिया पूरी मानी जाएगी।
जनगणना विभाग ने प्रदेश के लोगों से अपील की है कि वे इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में सहयोग करें, ताकि जनगणना प्रक्रिया समय पर और सटीक तरीके से पूरी हो सके।