हरिद्वार। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ में इमरजेंसी सेवा और क्रिटिकल केयर अस्पताल का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने अस्पताल परिसर का निरीक्षण कर इंटीग्रेटेड मेडिसिन सिस्टम के तहत शुरू की गई इस नई चिकित्सा पहल की सराहना की। अमित शाह ने कहा कि यह अस्पताल आधुनिक चिकित्सा पद्धति के साथ योग, आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा का समन्वय प्रस्तुत करता है और इसे विश्व का प्रथम हाइब्रिड हॉस्पिटल कहा जा सकता है।
उद्घाटन से पूर्व केंद्रीय गृहमंत्री ऋषिकेश में आयोजित ‘कल्याण पत्रिका’ के शताब्दी समारोह में शामिल हुए। कार्यक्रम के बाद उन्होंने रात्रि विश्राम पतंजलि योगपीठ में किया। इस दौरान योगगुरु स्वामी रामदेव के साथ उन्होंने योगपीठ में संचालित स्वास्थ्य सेवाओं, उपचार पद्धतियों और शोध कार्यों की विस्तृत जानकारी ली।
पतंजलि योगपीठ परिसर में अमित शाह के आगमन पर पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ उनका स्वागत किया गया। कन्याओं ने तिलक लगाकर उनका अभिनंदन किया, जबकि गुरुकुलम और आचार्यकुलम के छात्र-छात्राओं ने उनसे संवाद किया। पतंजलि परिवार ने इस अवसर को गौरव, प्रेरणा और सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण बताया।
योगगुरु स्वामी रामदेव ने कहा कि यह पूरे पतंजलि परिवार के लिए गर्व का क्षण है कि विश्व के इतिहास के पहले इंटीग्रेटेड हॉस्पिटल का उद्घाटन ऐसे नेता के हाथों हुआ है, जो राष्ट्रधर्म के साथ-साथ सनातन धर्म, योग और आयुर्वेद को सर्वोच्च मानते हैं। उन्होंने बताया कि इस अस्पताल में 90 से 99 प्रतिशत रोगियों को योग, आयुर्वेद, नेचुरोपैथी, पंचकर्म, षट्कर्म, पंच महाभूत चिकित्सा, मेडिकेटेड वाटर व फूड, उपवास और उपासना के माध्यम से स्वस्थ करने का लक्ष्य रखा गया है।
स्वामी रामदेव ने यह भी स्पष्ट किया कि पतंजलि एलोपैथी चिकित्सा का विरोधी नहीं है। उन्होंने कहा कि वे गैर-जरूरी दवाओं, अनावश्यक ऑपरेशन और बेवजह की जांचों के खिलाफ हैं। किडनी रोगियों के लिए डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, लेकिन उन्हें डायलिसिस तक पहुंचने से बचाने का हरसंभव प्रयास किया जाता है। उन्होंने बताया कि ब्रेन सर्जरी से पहले मेधा वटी और मैमोरी ग्रिट जैसी औषधियों पर भरोसा किया जाता है, जबकि यज्ञ चिकित्सा के तहत मेधा यष्टि, ब्राह्मी, शंखपुष्पी और ज्योतिष्मति से हवन कराकर उपचार किया जाता है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक और पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों का यह समन्वय आने वाले समय में देश की स्वास्थ्य व्यवस्था को नई दिशा देगा।