अंकिता भंडारी हत्याकांड में निष्पक्ष जांच और कथित वीआईपी की भूमिका उजागर करने की मांग को लेकर रविवार को उत्तराखंड बंद का आह्वान किया गया। कांग्रेस, उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) सहित कई सामाजिक संगठनों द्वारा बुलाए गए इस बंद का प्रदेशभर में आंशिक असर देखने को मिला। आंदोलनकारियों की प्रमुख मांग है कि मामले की सीबीआई जांच सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में कराई जाए, ताकि किसी भी तरह के दबाव या पक्षपात की गुंजाइश न रहे।
हालांकि राज्य सरकार पहले ही अंकिता भंडारी प्रकरण में सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुकी है, लेकिन संगठनों का कहना है कि केवल जांच एजेंसी बदलने से न्याय सुनिश्चित नहीं होगा। उनका जोर इस बात पर है कि जांच प्रक्रिया पूरी तरह स्वतंत्र और पारदर्शी हो।
प्रदेश बंद का असर ग्रामीण क्षेत्रों में अधिक देखने को मिला, जहां कई स्थानों पर बाजार पूरी तरह बंद रहे। इसके विपरीत शहरी इलाकों में बंद का खास असर नहीं दिखा और सामान्य जनजीवन काफी हद तक सुचारू रहा। कई जिलों में राजनीतिक दलों और संगठनों ने जुलूस निकालकर प्रदर्शन किया तथा खुली दुकानों को बंद कराने का प्रयास भी किया, लेकिन कुछ समय बाद बाजार फिर से खुल गए।
गढ़वाल मंडल के पौड़ी, श्रीनगर, कीर्तिनगर, श्रीकोट, दुगड्डा, सतपुली, बीरोंखाल, एकेश्वर, पोखड़ा, देवप्रयाग, हिंडोलाखाल और जामणीखाल क्षेत्रों में अधिकतर बाजार बंद रहे। कोटद्वार और लैंसडौन में दुकानें खुली रहीं। चमोली जिले में बंद का मिला-जुला असर रहा। नंदानगर, कर्णप्रयाग, नारायणबगड़, थराली, देवाल, गैरसैंण और गौचर में बाजार बंद रहे, जबकि गोपेश्वर और ज्योतिर्मठ में साप्ताहिक अवकाश के कारण दुकानें पहले से ही बंद थीं।
रुद्रप्रयाग जिले में भी बंद का प्रभाव देखा गया। टिहरी और उत्तरकाशी जिलों में कहीं दुकानें खुली रहीं तो कहीं व्यापार प्रभावित रहा। साप्ताहिक अवकाश के चलते घनसाली, लंबगांव और नरेंद्रनगर की अधिकांश दुकानें बंद रहीं, जबकि शहरी क्षेत्रों में गतिविधियां सामान्य बनी रहीं।
राजधानी देहरादून में संगठनों और यूकेडी ने रैली निकालकर पल्टन बाजार में दुकानें बंद कराने का प्रयास किया। कुछ देर के लिए बाजार बंद भी रहे, लेकिन रैली के हटते ही दुकानदारों ने फिर से दुकानें खोल दीं। हरिद्वार और रुड़की में कांग्रेस ने न्याय यात्रा निकाली, हालांकि यहां बाजार खुले रहे।
कुमाऊं मंडल में बंद का असर सीमित रहा। हल्द्वानी में बाजार सामान्य रूप से खुले रहे। बागेश्वर जिले में बंद का आंशिक असर देखा गया, जबकि पिथौरागढ़ और चंपावत में अधिकांश दुकानें खुली रहीं।
गौरतलब है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर प्रदेशभर में लगातार आक्रोश बना हुआ है। विपक्षी दल और सामाजिक संगठन दोषियों को सख्त सजा दिलाने तथा मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने की मांग पर लगातार आंदोलन कर रहे हैं।