जाति जनगणना पर एमके स्टालिन का केंद्र से आग्रह, सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को परामर्श प्रक्रिया में शामिल करने की मांग

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने आगामी जनगणना में जाति आधारित आंकड़ों को शामिल करने को लेकर केंद्र सरकार से व्यापक परामर्श की मांग की है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर कहा है कि जाति जनगणना जैसे संवेदनशील विषय पर निर्णय लेते समय सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों को शामिल करते हुए एक मजबूत और परामर्शी तंत्र बनाया जाना चाहिए, ताकि आंकड़े सटीक, स्पष्ट और भरोसेमंद हों।

मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने पत्र में कहा कि जातियों से जुड़े प्रश्न, उनके वर्ग और उपवर्ग तथा आंकड़े एकत्र करने की पद्धति पूरी तरह पारदर्शी और समावेशी होनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इस प्रक्रिया में पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई, तो गलत आंकड़े सामने आ सकते हैं, जिससे सामाजिक विवाद और विभाजन की स्थिति पैदा हो सकती है।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि भले ही जनगणना कराना केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है, लेकिन इसके परिणामों का सीधा असर राज्यों की शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और कल्याणकारी योजनाओं पर पड़ता है। ऐसे में केंद्र सरकार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से परामर्श कर उनकी सामाजिक और क्षेत्रीय परिस्थितियों को ध्यान में रखना चाहिए। इससे न केवल बेहतर नीति निर्माण संभव होगा, बल्कि देश की संघीय व्यवस्था भी सुदृढ़ होगी।

स्टालिन ने सुझाव दिया कि जाति जनगणना की प्रक्रिया शुरू करने से पहले पायलट परीक्षण जैसे कदम उठाए जाएं, जिससे आंकड़ों की विश्वसनीयता सुनिश्चित की जा सके और सामाजिक न्याय को मजबूती मिले। उन्होंने विश्वास जताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में यह पहल भारत में समानता और समावेशिता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।

गौरतलब है कि तमिलनाडु लंबे समय से जाति आधारित जनगणना की मांग करता रहा है। राज्य विधानसभा पहले ही इस संबंध में केंद्र सरकार से अनुरोध करते हुए प्रस्ताव पारित कर चुकी है। मुख्यमंत्री स्टालिन ने कहा कि जाति विवरण को जनगणना में शामिल करना साक्ष्य आधारित सामाजिक न्याय और न्यायसंगत नीति निर्माण की दिशा में एक अहम कदम है।

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