राष्ट्रीय प्रवासी दिवस पर रिवर्स पलायन की मिसाल, गांव लौटे प्रवासियों ने स्वरोजगार से बदली अपनी और गांवों की तकदीर

राष्ट्रीय प्रवासी दिवस के अवसर पर उत्तराखंड से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। रोजगार और बेहतर जीवन की तलाश में वर्षों पहले गांवों से देश-विदेश गए प्रवासी उत्तराखंडी अब अपने पैतृक गांव लौटकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं। रिवर्स पलायन करने वाले ये प्रवासी स्वरोजगार को अपनाकर न केवल अपनी आजीविका मजबूत कर रहे हैं, बल्कि गांवों में विकास और रोजगार की नई उम्मीद भी जगा रहे हैं।

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग की रिवर्स पलायन रिपोर्ट-2025 के मुताबिक, पिछले पांच वर्षों में राज्य के 13 जिलों में कुल 6282 प्रवासी अपने गांव वापस लौटे हैं। इनमें 169 प्रवासी विदेशों से, 4769 देश के अन्य राज्यों से और 1127 अन्य जिलों से वापस आए हैं। रिपोर्ट के अनुसार, प्रदेश सरकार की योजनाओं और प्रयासों के चलते रिवर्स पलायन को लगातार बढ़ावा मिल रहा है।

विदेशों से गांव लौटने वाले प्रवासियों में चीन, दुबई, ओमान, भूटान, जांबिया, सिंगापुर, सऊदी अरब, मॉरीशस, कैलिफोर्निया, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, जापान, कतर, नेपाल, कुवैत, कीनिया, मालदीप, हांगकांग, दक्षिण अफ्रीका, थाइलैंड, पोलैंड, रूस, तंजानिया, नाइजीरिया, अबूधाबी सहित अन्य देशों के प्रवासी शामिल हैं। इन प्रवासियों में सबसे अधिक संख्या टिहरी जिले से लौटने वालों की है।

गांव लौटे प्रवासियों के पास पहले से रोजगार और व्यवसाय का अनुभव था। उन्होंने राज्य सरकार की स्वरोजगार योजनाओं का लाभ उठाकर अपने अनुभव के आधार पर विभिन्न आर्थिक गतिविधियां शुरू कीं। रिपोर्ट के अनुसार, रिवर्स पलायन करने वाले प्रवासियों में से 39 प्रतिशत ने कृषि और बागवानी क्षेत्र में, 21 प्रतिशत ने पर्यटन गतिविधियों और होम-स्टे, 18 प्रतिशत ने पशुपालन, जबकि 6 प्रतिशत ने दुकान, रेस्टोरेंट और मसाला उद्योग जैसे व्यवसायों में काम शुरू किया है।

हर जिले में होगी प्रवासी पंचायत

रिवर्स पलायन को और गति देने के उद्देश्य से मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस वर्ष राज्य के प्रत्येक जिले में प्रवासी पंचायत आयोजित करने के निर्देश दिए हैं। उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग इसके लिए विस्तृत कार्ययोजना तैयार कर रहा है। प्रवासी पंचायतों में गांव लौटे प्रवासियों की सफल कहानियों, उनके अनुभवों और समस्याओं पर चर्चा कर समाधान निकाला जाएगा।

उत्तराखंड पलायन निवारण आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. एस.एस. नेगी ने बताया कि रिवर्स पलायन कर गांव लौटे प्रवासियों के अनुभवों का राज्य को बड़ा लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि उत्तरकाशी जैसे जिलों में प्रवासी मोटे अनाजों की ऑनलाइन मार्केटिंग कर रहे हैं, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा मिल रही है। आने वाले समय में रिवर्स पलायन को और मजबूती देने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *