नई दिल्ली: अनचाही गर्भावस्था से बचाव के लिए इस्तेमाल की जाने वाली आई पिल का प्रयोग युवतियों में तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्वास्थ्य के लिए चिंताजनक है। जानकारी की कमी और गलतफहमी के कारण इसे कई लोग नियमित गर्भनिरोधक विकल्प की तरह ले रहे हैं, जबकि यह केवल आपातकालीन स्थिति में उपयोग के लिए बनाई गई है।
हार्मोनल असंतुलन का खतरा
चिकित्सकों के अनुसार, आई पिल में हार्मोन की मात्रा बहुत अधिक होती है। बार-बार लेने से शरीर का प्राकृतिक हार्मोन संतुलन बिगड़ सकता है। इसके परिणामस्वरूप पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, अत्यधिक या कम रक्तस्राव हो सकता है, मतली, सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं। कुछ मामलों में मानसिक तनाव और मूड स्विंग्स भी देखी जा रही हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
गुरु तेग बहादुर अस्पताल के एडिशनल मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉ. प्रवीण कुमार ने बताया कि आई पिल केवल आपातकालीन स्थिति में ही ली जानी चाहिए। नियमित सेवन से हार्मोनल असंतुलन, पीरियड्स की गड़बड़ी, अत्यधिक रक्तस्राव और भविष्य में प्रजनन संबंधी दिक्कतें हो सकती हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, आई पिल का सेवन असुरक्षित यौन संबंध के 72 घंटे के भीतर ही प्रभावी होता है।
गलतफहमी बन रही बड़ी वजह
विशेषज्ञों का कहना है कि युवाओं में यौन स्वास्थ्य और गर्भनिरोधक उपायों को लेकर सही जानकारी की कमी इस स्थिति की सबसे बड़ी वजह है। कई लोग मान लेते हैं कि आई पिल पूरी तरह सुरक्षित है और इसे कभी भी लिया जा सकता है। यह धारणा गलत है। डॉक्टर नियमित गर्भनिरोधक उपाय जैसे कंडोम या अन्य सुरक्षित विकल्पों के लिए परामर्श लेने की सलाह देते हैं।
निष्कर्ष
डॉक्टरों ने कहा कि यौन स्वास्थ्य पर खुलकर बातचीत और सही जानकारी बेहद जरूरी है। आई पिल को हमेशा अंतिम विकल्प के रूप में ही अपनाना चाहिए। बार-बार समस्या होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लेना स्वास्थ्य के लिए बेहतर और सुरक्षित तरीका है।