नई दिल्ली।
देश की ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में ऐतिहासिक बदलाव करते हुए केंद्र सरकार ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) के स्थान पर नया ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ यानी VB-G RAM G (जी राम जी) लागू कर दिया है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह कानून 21 दिसंबर 2025 से प्रभावी हो गया है।
सरकार का दावा है कि नया कानून ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के साथ-साथ टिकाऊ अवसंरचना के निर्माण को गति देगा, जबकि विपक्ष और अर्थशास्त्री इसे राज्यों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ और मजदूरों के अधिकारों में कटौती के रूप में देख रहे हैं।
रोजगार के दिन बढ़े, लेकिन शर्तों के साथ
नए कानून के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिन के रोजगार की वैधानिक गारंटी दी गई है, जो मनरेगा के 100 दिनों से अधिक है। हालांकि, यह गारंटी अब मांग आधारित नहीं होगी। काम की उपलब्धता केंद्र सरकार द्वारा पहले से तय नॉर्मेटिव एलोकेशन पर निर्भर करेगी।
मजदूरी भुगतान का नया फॉर्मूला
मनरेगा में अकुशल मजदूरी का 100 प्रतिशत खर्च केंद्र सरकार उठाती थी।
नए कानून में यह व्यवस्था बदल दी गई है। अब मजदूरी का 60 प्रतिशत केंद्र और 40 प्रतिशत राज्य सरकारें वहन करेंगी। अनुमान है कि इससे राज्यों पर हर साल करीब ₹55,000 करोड़ का अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।
संकट के समय राज्यों पर पूरी जिम्मेदारी
पहले सूखा, बाढ़ या आपदा की स्थिति में केंद्र सरकार अतिरिक्त बजट जारी करती थी। नए कानून में खर्च की सीमा पहले से तय होगी। यदि मांग तय सीमा से अधिक होती है, तो पूरा अतिरिक्त खर्च राज्य सरकारों को खुद उठाना होगा।
खेती के मौसम में 60 दिन का अनिवार्य विराम
नए कानून में कटाई और बुवाई के पीक सीजन के दौरान 60 दिनों के अनिवार्य ब्रेक का प्रावधान किया गया है। सरकार का तर्क है कि इससे कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे, जबकि आलोचकों का कहना है कि इससे भूमिहीन मजदूरों की आय पर नकारात्मक असर पड़ेगा।
ग्राम सभा की भूमिका सीमित
मनरेगा में ग्राम सभा को काम तय करने का अधिकार था। नए कानून में पंचायतों को प्रस्ताव ‘विकसित भारत राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक’ के अनुरूप बनाने होंगे। सभी परियोजनाओं को पीएम गति शक्ति GIS प्लेटफॉर्म से जोड़ना अनिवार्य किया गया है।
डिजिटल हाजिरी अनिवार्य
पारदर्शिता के नाम पर अब बायोमेट्रिक और AI आधारित हाजिरी सिस्टम लागू किया गया है। कमजोर इंटरनेट वाले ग्रामीण इलाकों में इसे लेकर व्यावहारिक दिक्कतों की आशंका जताई जा रही है।
सरकार और विपक्ष के तर्क
सरकार का कहना है कि मनरेगा गैर-उत्पादक कार्यों और भ्रष्टाचार तक सीमित हो गई थी, जबकि ‘जी राम जी’ कानून स्थायी संपत्तियों और दीर्घकालीन विकास पर केंद्रित है।
वहीं विपक्ष ने इसे संघीय ढांचे पर हमला बताते हुए कहा है कि मजदूरी का 40 प्रतिशत बोझ डालकर गरीब राज्यों को आर्थिक रूप से कमजोर किया जा रहा है।
कुल मिलाकर, ‘जी राम जी’ कानून ग्रामीण रोजगार नीति में एक बड़ा बदलाव है, जिसका असर आने वाले समय में राज्यों की वित्तीय स्थिति, ग्रामीण मजदूरों की आय सुरक्षा और केंद्र–राज्य संबंधों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा।