देहरादून। उत्तराखण्ड में वर्ष 2027 में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके लिए भाजपा और कांग्रेस सहित अन्य राजनीति दलों ने अभी से कमर कस ली है। भाजपा के बडे़ नेताओं के दौरे प्रदेश में लगने शुरू हो गए हैं और कांग्रेस इस बार कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ना चाहती है। आगामी विधानसभा चुनाव जहां कांग्रेस के लिए ‘अस्तित्व’ की लड़ाई और भाजपा के लिए एंटी एनकंबेंसी की चुनौती है। कुल मिलाकर भाजपा और कांग्रेस के लिए यह चुनाव खास है। जबकि क्षेत्रीय दल उक्रांद को भी उम्मीद है कि इस विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी अपनी दमदार उपस्थिति दर्ज कराएगी।
सत्ता से दूर कांग्रेस इस विधानसभा चुनाव में ‘एंटी इनकंबेंसी’ आसान शब्दों में सत्ता विरोधी लहर चलाकर सत्ता हथियाने की तैयारियां कर रही हैं। कांग्रेस की पहली प्राथमिकता यह है कि प्रदेश में सरकार के खिलाफ अभी से मैदान सजाकर उस पर राजनीति की जाए। इसके लिए कांग्रेस पार्टी अभी से आक्रामक हो गई है। कांग्रेस नित धरना-प्रदर्शन से सरकार के लिए समस्या खड़ी करने में लगी है।
वैसे भी कांग्रेस पार्टी प्रदेश में पेपर लीक, अंकिता भंडारी हत्याकांड में वीआईपी का खुलासा सहित बेरोजगारी को लेकर सरकार को घेर रही है। राजनीतिज्ञ बताते हैं कि प्रदेश में पिछले 6 महीने के भीतर कांग्रेस का ग्राफ गढ़वाल क्षेत्र में काफी बड़ा है, जिसका मुख्य कारण भाजपा के नेताओं के मुंह से निकली राजनीतिक बयानबाजी काफी हद तक कांग्रेस की मदद कर रही है।
दूसरी ओर कांग्रेस के आक्रामक रूख के चलते सीएम पुष्कर धामी भी अधिक आक्रामक नजर आ रहे हैं। सीएम धामी अब वायदों और दावों को लेकर विपक्ष के हमलों पर भी तेजी से पलटवार कर रहे हैं। धामी अपनी बड़ी उपलब्धियों को और वर्ष 2022 के चुनावी वायदे को पूरा कर राजनीतिक एजेंडे को लेकर धरातल पर उतर रहे हैं। वहीं केंद्र और राज्य की कई महत्वपूर्ण विकास एवं कल्याणकारी योजनाओं को जमीनी स्तर पर क्रियान्वित करने के बल से मुख्यमंत्री को ऊर्जा मिल रही है। उन्होंने 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए जमीन तैयार कर दी है। समान नागरिक संहिता सहित कई अन्य मास्टर स्ट्रोक खेलकर विपक्ष का मुंह बंद करने की तैयारी चल रही है। दूसरी ओर क्षेत्रीय दल यूकेडी से जुड़कर युवा भी मैदान में उतरकर सरकार की राह में कांटे बिछाने का काम कर रहे हैं।